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S Ram Verma

Abstract


5.0  

S Ram Verma

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अभिव्यक्त भावनाएं !

अभिव्यक्त भावनाएं !

1 min 289 1 min 289

भावनाए जब बहती है

तो बहकर वो सब कुछ 

ही तो कह देना चाहती है

और कई बार वो खो जाती है 

मन के अथाह महा सागर की  

किसी ऊँची नीची होती लहर 

के नीचे दबकर जैसे कोई 

अनजान भंवर लील लेता है 

उसे खुद में ठीक वैसे ही 

भावनाएं मन में उठती है 

और मन ही में मर जाती है

या कभी-कभी वो बन आंसू 

खुद अपनी मौत बन जाती है

कभी कोई अधूरा चित्र बना 

वो अपनी लाचारी कहती है

और कभी-कभी पाकर वो  

कलम और स्याही का सहारा 

कविता भी बन जाती है...

जब भावनाए बहती है

तो बहकर वो सब कुछ 

ही तो कह देना चाहती है



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