STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

3  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

अभी मंजिल बाकी है

अभी मंजिल बाकी है

1 min
360

अभी सांस बाकी है

अभी आस बाकी है

चलता चल तू साखी,

अभी मंजिल बाकी है

अभी चला चंद कदम,

अभी फ़लक बाकी है

कुछ शूलों से क्या डर,

कुछ फूलो से क्या घर,

अभी पूरा बाग बाकी है

अभी मंजिल बाकी है

कुछ ख़्वाब पूरे हुए,

पर आंसू मोती न हुए,

अभी तेरी प्यास बाकी है

जिसमे दरिया की माटी है

तुझे चढ़ना माउंट एवरेस्ट,

अभी तेरा निशाँ बाकी है

जिस्म तेरा भले मर जाये,

तेरी रोशनी सदा रह जाये,

बन जा वो दीपक साखी,

जो चमके सूर्य की भांति है

अभी मंजिल बाकी है

सितारों को छूना बाकी है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational