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Shrutika Sah

Abstract Classics

4  

Shrutika Sah

Abstract Classics

अभी बाकी था !

अभी बाकी था !

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मेरी उंगलियो पर रंग छोड़ गए

उस लाल शहतूत का

तुम्हारी सफेद पोशाक को रंगदेना

अभी बाकी था।


मानसून की पहली बारिश में भीगी

तुम्हारीं अञुलि में महकती मिट्टी का

मेरी हथेली पर चुम्बन करना

अभी बाकी था।


तुम्हारे आने की घटना का विशिष्ट हो जाना

और

तुम्हारे चले जाने में और व़क्त

अभी बाकी था।


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