STORYMIRROR

Shrutika Sah

Abstract Classics

4  

Shrutika Sah

Abstract Classics

अभी बाकी था !

अभी बाकी था !

1 min
238

मेरी उंगलियो पर रंग छोड़ गए

उस लाल शहतूत का

तुम्हारी सफेद पोशाक को रंगदेना

अभी बाकी था।


मानसून की पहली बारिश में भीगी

तुम्हारीं अञुलि में महकती मिट्टी का

मेरी हथेली पर चुम्बन करना

अभी बाकी था।


तुम्हारे आने की घटना का विशिष्ट हो जाना

और

तुम्हारे चले जाने में और व़क्त

अभी बाकी था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract