Shrutika Sah
Inspirational
तेरे बदन से कुछ विमुक्त हो
तो रुक मत
तेरी रूह से कुछ रिक्त हो
तो झुक मत
चौकोर से चिथड़े से भी तो अलग होता है कपड़ा
रूप दिया जाता है तिकोना
और बन जाता है
परचम
अनादिकाल के लिए!!
गिरना!!
कुछ बेहतरीन क...
भारत के मानचि...
बोझिल हृदय
पढ़ सकूँ कोई क...
सबसे बुद्धिमा...
परचम बन जाता ...
सभ्यता तक!!
रत्नगर्भा याद...
अभी बाकी था !
वीतरागी बनकर काल दे रहा सबको निमंत्रण महामारी का रूप धरकर। वीतरागी बनकर काल दे रहा सबको निमंत्रण महामारी का रूप धरकर।
हाथ नहीं होते नसीब होते है उनके भी, तू मुट्ठी में बंद लकीरों को लेकर रोता है। हाथ नहीं होते नसीब होते है उनके भी, तू मुट्ठी में बंद लकीरों को लेकर रोता है।
खुद ही पनप गया बिना किसी अपनेपन के यही वजह काफी थी लोगों के थोथेपन की खुद ही पनप गया बिना किसी अपनेपन के यही वजह काफी थी लोगों के थोथेपन की
तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी, तू न थकेगा कभी, तू न थमेगा कभी,
महान वो इंसान होते हैँ जो दिल से सच्चे होते हैँ! महान वो इंसान होते हैँ जो दिल से सच्चे होते हैँ!
उस घर में खुशियां छाए, जिस घर में तुम्हारी पूजा हो। उस घर में खुशियां छाए, जिस घर में तुम्हारी पूजा हो।
हाथ थामने वालों के भी हौसले बुझते देखा है.. हाथ थामने वालों के भी हौसले बुझते देखा है..
विजयश्री तुमको मिलेगी। यूं ठहरना राहत दे भले ही, विजयश्री तुमको मिलेगी। यूं ठहरना राहत दे भले ही,
आ बैठ ज़रा.. पल-पल का मेरा हिसाब कर आ बैठ ज़रा.. पल-पल का मेरा हिसाब कर
अपने कोमल पंखों से दूर नभ तक भरती उड़ान। अपने कोमल पंखों से दूर नभ तक भरती उड़ान।
कितने नादानों ने मुँह अपना सिया होगा। कितने नादानों ने मुँह अपना सिया होगा।
अंग्रेजों के राज में जो लाया आंधी, वह है मेरा सबका प्यारा गाँधी। अंग्रेजों के राज में जो लाया आंधी, वह है मेरा सबका प्यारा गाँधी।
लाकडाउन जैसे ही खुला वैसे ही, लोग लापरवाह हो गए। लाकडाउन जैसे ही खुला वैसे ही, लोग लापरवाह हो गए।
कलम किसी को कभी कहाँ संतुष्ट कर पायी है कलम किसी को कभी कहाँ संतुष्ट कर पायी है
इंसानों के दिलों में एक पवित्र प्यार, मृत्यु ही विदा कर सकती है। इंसानों के दिलों में एक पवित्र प्यार, मृत्यु ही विदा कर सकती है।
जप तप ध्यान और साधना से बढ़ाओ मन की शक्ति जप तप ध्यान और साधना से बढ़ाओ मन की शक्ति
दिल तोड़कर बहुरूपिया छुप गए हैं बिल में दिल तोड़कर बहुरूपिया छुप गए हैं बिल में
माँ के जतन से ही सृष्टि पली है । माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है माँ के जतन से ही सृष्टि पली है । माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है
अपने हित को जो बस समझे, धिक्कार के ही पात्र है। अपने हित को जो बस समझे, धिक्कार के ही पात्र है।
वो जो हँसते थे कल संग .... क्या आज चले जायेंगे। वो जो हँसते थे कल संग .... क्या आज चले जायेंगे।