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Manju Saini

Tragedy

4  

Manju Saini

Tragedy

:अब मात्र

:अब मात्र

2 mins
236



शायद वह ईंट पत्थर का

घर मात्र नही था

हर गर्मियों की छुट्टियों मे

याद आता हैं वह घर जो

छूट गया हैं आप दोनों के जाने से

शायद अब कभी नही..?

अभी भी सामने से निकलती हूँ

कभी तो दिखता हैं सड़क से ही

मात्र ईंट पत्थर का बना वो घर

आपके रहने से जो स्वर्ग था

अब मात्र….

आस-पड़ोस भी शायद अब नही है

रिश्ते-नाते तो मानों मर ही गए थे

आपके जाने के बाद

बदलती ऋतुएं हैं सुना करती थी

पर रिश्तों को भी गिरगिट बनते देखा है

आपका मेरे आने पर खुश होना

अब मात्र….

पापा का अपनी तोंद पर लिटाकर सहलाना

आज भी आपकी बिटिया को

तदफ़ाता हैं छुट्टियों में

आज आप स्वप्न में आकर सुने मेरी सिसकियां

जिसे आप छोड़ आये है मेरे पास

पल पल साथ रहने को

अब मात्र….

न जाने क्या कुसूर था जो यह सब हुआ

कभी किसी बिटिया का घर न छुटे

बस यही प्रभु से मेरी दुआ

एक घर ही नही छुटा आप भी

मुँह मोड़ चल दिये छोड़ बिटिया को

अनाथ,बेसहारा,बेबस,लाचार


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