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Indraj Aamath

Abstract Drama Others

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Indraj Aamath

Abstract Drama Others

अब जीवन जीना है

अब जीवन जीना है

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अब मैं घूमता हूँ
अपने ही ख़्यालों में,
कभी इंस्टा की दुनिया में,
तो कभी यू-ट्यूब के जालों में।

मेरे पाँव अब
ठहर से गए हैं,
ज़िंदगी की उन
बोझिल जिम्मेदारियों में बंध गए हैं।

अब मैं ठहर गया हूँ
धातुओं के मोह में,
मैं खुद को खो बैठा
इन तंग गलियों के शोर में।

वो खुली वादियाँ
अब इंतज़ार नहीं करतीं,
नीला गगन भी
मुझसे कोई बात नहीं करता।

ना मैं कुछ लाया था,
ना कुछ ले जाऊँगा,
पर इन ऊँचे आदर्श में
अब कहीं बिखर जाऊँगा।

अब जीवन जीना है
बस संचित करने के लिए,
शायद धातुओं के ढेर में
खुशियाँ मिलें कहीं छुपे हुए।

अब जीवन जीना है
इन तंग गलियों के बीच,
शायद कंक्रीट के जंगल में
साँसें हों थोड़ी अधिक।

अब जीवन जीना है
उन चार लोगों के साथ,
शायद उन्हीं के तराज़ू में
तौली जाए मेरी हर बात।

हूँ मैं असहाय अब
कुछ इस कदर यहाँ,
कि मेरी कब्र पर भी
सोने की पॉलिश चढ़ाई जाएगी।


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