आज़ाद हिन्द फौज के सिरमौर
आज़ाद हिन्द फौज के सिरमौर
बनाया फौज आजाद हिंद का,
हिला दिया गोरों को सारा।
लहू के बदले लो आजादी,
दिया सुभाष चंद्र ने नारा।।
नौजवान मर मिटने खातिर,
आकर संग खड़े हो जाते।
हर दहाड़ इस हिंद फौज की,
गोरों को औकात दिखाते।।
आजादी के मतवालों ने,
अद्भुत बहा दिया इक धारा।
लहू के बदले लो आजादी,
दिया सुभाष चंद्र ने नारा।।
डर सुभाष से अंग्रेजों ने,
हर झूठे आरोप लगाए।
मातृभूमि की खातिर फौजी,
बारम्बार जेल हो आए।।
गूँज उठा तब हिंद देश में,
भारत माता का जयकारा।
लहू के बदले लो आजादी,
दिया सुभाष चंद्र ने नारा।।
जीवन अर्पित किया देश को,
बोस वीर योद्धा कहलाए।
अमर हुए इतिहास बताता,
अपनों से ही धोखे खाए।।
कुर्बानी के कारण उभरा,
वीर क्षितिज में बन ध्रुव तारा।
लहू के बदले लो आजादी,
दिया सुभाष चंद्र ने नारा।।
तोड़ गुलामी की जंजीरें,
भारत ने आजादी पायी।
चीख शहीदों की मत भूलों,
बहुत काम कुर्बानी आयी।।
नमन बोस को करते सारे,
झुका नहीं सिर कभी हमारा।
लहू के बदले लो आजादी,
दिया सुभाष चंद्र ने नारा।।
