Deepak Dixit
Abstract
गरीब
आया है तो क्या लेकर आया है ?
जायेगा तो क्या देकर जायेगा ?
अमीर
आया है तो कहाँ से निचोडूं ?
जा रहा है तो क्या खींच लूँ ?
योगी
न अपनी मर्ज़ी से आया है,
ना अपनी मर्ज़ी से जायेगा
क्या किसी ने पा लिया
और क्या तू पा जायेगा ?
मधुशाला
आज में सठियान...
दर्जी
जब करोना को र...
कुछ न कहा जाय...
सांस तू बोर न...
मैं...
उम्र हो गयी ब...
गुस्ताख़ मजनू
धर्म निष्ठा का हुआ अद्वितीय अनुष्ठान है रामलला का हुआ प्रतिष्ठान है। धर्म निष्ठा का हुआ अद्वितीय अनुष्ठान है रामलला का हुआ प्रतिष्ठान है।
महज औपचारिकताओं की पूर्ति का माध्यम हो जाता है, महज औपचारिकताओं की पूर्ति का माध्यम हो जाता है,
अपने छोटों को स्नेह प्यार से बांधे रखना, उनकी हर भूल को माफ कर देना, अपने छोटों को स्नेह प्यार से बांधे रखना, उनकी हर भूल को माफ कर देना,
गणतंत्र की "कार्य पालिका" की विचित्र संरचना। गणतंत्र की "कार्य पालिका" की विचित्र संरचना।
तुझ पर भरोसा हम को रब से ज्यादा है, तूने जीना सिखाया मुझको तेरी सच्चाई पर यकीन हमको, तुझ पर भरोसा हम को रब से ज्यादा है, तूने जीना सिखाया मुझको तेरी सच्चाई पर ...
रास्ते तुमने अपने बदले ये तुम्हारी खता है, हम आज भी वहीं खड़े है ये हमारी सजा है, रास्ते तुमने अपने बदले ये तुम्हारी खता है, हम आज भी वहीं खड़े है ये हमारी सजा ...
मनवा सबका पावन हो, वेद-शास्त्र का प्रसारण । मनवा सबका पावन हो, वेद-शास्त्र का प्रसारण ।
अब तो थोड़ी सी खुशियाँ मेरे दामन में भी डाल दे, अब तो थोड़ी सी खुशियाँ मेरे दामन में भी डाल दे,
तुम युग भी हो कालांतर हो , या शरीर प्राण का अंतर हो , तुम युग भी हो कालांतर हो , या शरीर प्राण का अंतर हो ,
या वह सत्य प्रेम की परिभाषा, जो राधे ने तुमसे था किया। या वह सत्य प्रेम की परिभाषा, जो राधे ने तुमसे था किया।
देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का जब प्रश्न उठता, देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का जब प्रश्न उठता,
अयोध्या नगरी बनी सबकी मनभावन, ज़ब से राम लला का हुआ आगमन ! अयोध्या नगरी बनी सबकी मनभावन, ज़ब से राम लला का हुआ आगमन !
लाख पुकारा मैंने तुमको लेकिन प्रीत बनी बहरी । लाख पुकारा मैंने तुमको लेकिन प्रीत बनी बहरी ।
पढ़ ली भगवत गीता मैंने फिर भी मोह न तज पाया। पढ़ ली भगवत गीता मैंने फिर भी मोह न तज पाया।
मन की बुराइयों को दूर करने और उसे सत्य, ईमानदारी, सेवाभाव मन की बुराइयों को दूर करने और उसे सत्य, ईमानदारी, सेवाभाव
प्रशिक्षण संस्थानों के बाजारों में लूटते, टूटते उम्मीदों के दास्तान लिख गया।। प्रशिक्षण संस्थानों के बाजारों में लूटते, टूटते उम्मीदों के दास्तान लिख गया।।
आओ नई शुरुआत करते हैं आओ नई शुरुआत करते हैं
तुम बिन एक पल बिताना मुश्किल है अब तो आ जाओ अब तो आ जाओ, तुम बिन एक पल बिताना मुश्किल है अब तो आ जाओ अब तो आ जाओ,
अपनत्व भाव परायों का ठंडी में गर्मी भरते। अपनत्व भाव परायों का ठंडी में गर्मी भरते।
बसंत का त्यौहार है वसंत पंचमी संस्कार। बसंत का त्यौहार है वसंत पंचमी संस्कार।