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Arunima Bahadur

Inspirational

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Arunima Bahadur

Inspirational

आत्मसाक्षात्कार

आत्मसाक्षात्कार

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भूल गए क्यो हम सब जीना,

क्यो चिताओं की लकीरें हैं।

विधाता ने जब सजायी,

प्यारी प्यारी तकदीरें हैं।।


एक प्यारा सा मानव तन दे,

सद्गुणों से साकार किया।

कांटो में चल फूल बनने का,

संस्कार बी बेहिसाब दिया।।


भूलकर हम दिव्यता को,

अंधकार में भटक रहे।

दीपक जब हम स्वयं,

फिर तमस क्यो चुन रहे?


हर ओर जो हो घना अंधेरा,

प्रकाश हम स्वयं बन सकते है।

भीड़ ने जब जब साथ छोड़ा,

अकेले भी हम चल सकते हैं।


शक्ति हमारी ही अंतस में,

खोजने हम जग में चले।

खुशिया अंतस में विराजे,

मृग बन क्यो भागे फिरे।


एल पल तो ठहर कर,

कुछ विचार जरूरी है।

खुद को जानने के लिए,

आत्मसाक्षात्कार जरूरी है।।



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