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Minal Aggarwal

Abstract

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Minal Aggarwal

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आत्मा होती है एक चिड़िया सी

आत्मा होती है एक चिड़िया सी

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आत्मा भी होती है 

एक चिड़िया सी 

एक देह से निकलकर 

दूसरी देह या 

ऐसा ही कोई स्थान तलाशने 

के लिए 

दर दर भटकती फिरती है 

इस कायनात की हवाओं में 

एक श्वेत रंग की रोशनी से 

भरा होता है 

इसका स्वरूप 

यह जज्ब हो जाती है कहीं 

प्रकृति के ही रंगों में 

उन रंगों की रोशनी में 

उनकी चिलमन के पीछे ही कहीं 

छिप जाती है तभी तो 

नंगी आंखों से यह 

हर किसी को नजर नहीं 

आती है 

इसका आकार सूक्ष्म होता है 

लेकिन इसके कार्य महान 

और जीवन के उद्देश्य बड़े होते हैं 

इसका भार भी 

चिड़िया के परों की तरह ही हल्का 

होता है 

एक विडंबना इसके संदर्भ में 

यह है कि 

एक बार बिछड़ने पर 

यह आसानी से मिलती नहीं 

देह बदल लेती है 

अपने रूप बदल लेती है 

रंग बदल लेती है 

स्थान बदल लेती है 

अपने घर का पता जो 

कुछ समय के लिए ही 

स्थाई होता है 

उसे भी बदल लेती है 

अपने अस्तित्व की गरिमा 

पर यह आजीवन 

बरकरार रखती है 

एक पावन रोशनी से 

भरी रहती है 

इसका न जन्म होता है 

न ही मृत्यु 

यह अमर होती है 

एक निरंतर बहती 

किसी पवित्र जल सी होती है 

इतिहास गवाह है कि 

इसकी बुलंद इमारत कभी 

ध्वस्त नहीं होती 

यह कभी एक खंडहर में 

तब्दील नहीं होती 

एकाकीपन लिए 

यह हमेशा अपने होंठों पर 

एक मुस्कुराहट रखती है 

देखने वालों की आंखों में चाहे 

एक मोटी आंसू की लहर लहराती रहे।


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