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Sandip Kumar Singh

Inspirational Thriller

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Sandip Kumar Singh

Inspirational Thriller

आशा से जीवन

आशा से जीवन

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आशा के दीप से ही तो जिन्दगी जीया जाता है,

यूं निराश_हताश होकर तो कुछ फायदा ही नहीं।

दुनिया आशा और विश्वास पर टिका हुआ है,

नहीं तो फिर मानव तन पाकर भी पशु ही हैं।


चाहतों को उड़ान देकर ही मजा लिया जाता है,

मंजिल की ललक ही तो सुन्दर नाम छवि देता है।

दिन बदलेंगे अपने भी एक दिन अवश्य ही मित्रों,

जो हमने मिलकर के कभी सजाए संवारे थे मित्रों।


आशा रूपी नौका से नौका विहार करते चलूं,

आनन्दों के महासागर में गोता लगाता रहूं।

जैसी जिसकी भावना होती है,

वैसा ही वह फल भी पाता ही है।


गीत प्रेम का शौक से गाता रहूं,

मंगल कामना सदा करता रहूं।

फूलों सा सुरभित जीवन अपना,

सुन्दर सलोने दिल में ढेर सपना।


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