STORYMIRROR

Shobhit Bahuguna

Inspirational

4  

Shobhit Bahuguna

Inspirational

आरक्षण

आरक्षण

1 min
218

दांव पर सब कुछ लगा है 

रुक ‌‌ नहीं सकता 

तोड़ सकते हो तो तोड़ दो 

मगर झुक नहीं सकता 

प्रतिभा का संघर्ष सत्ता से 


अब रुक नहीं सकता 

न्याय का संघर्ष निरंकुशता से 

अब झुक नहीं सकता 

आरक्षण पर आरक्षण की पराकाष्ठा..


प्रतिभाशाली वर्ग सह नहीं सकता .

अभिमान रावण का भी

 टूटा है इसी धरा पर ...

सत्ता का लोलुप

 अब बच नहीं सकता.


आरक्षण की बैसाखी पर 

 यह देश.....

अब चल नहीं सकता.

 हम स्वयंभू हैं जाकर 

सम्राट को खबर कर दो.....


समय रहते आरक्षण को 

अब तुम खत्म कर दो.

अंधेरे को दी चुनौती

 है स्वयं दिनकर ने..

संभल जाओ धरा छोड़ो 

प्रतिभाओं से अब मुंह ना मोड़ो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational