STORYMIRROR

आमीन

आमीन

1 min
830


कितना प्यासा कौन मुसाफिर

किसने मौत गले तक देखी

किस-किसने तलवे रगडे़

मुझको है मालूम ये सूरत।


मैं तो तपती रेत का कुआँ

खुश्क-लबी का किस्सा कह दूँ ?

मरते दम की तड़प बता दूँ ?

सहमाहट की खा़ल दिखा दूँ ?

वहशत की तस्वीर बना दूँ ?


कौन कहाँ तक ज़ब्त का मारा

कौन यहाँ पर जीता हारा

मेरे अंदर सदियाँ प्यासी

मेरे बाहर दुनिया प्यासी।


पानी-पानी अजब नजा़रा

चाँदनी देती चाँद उतारा

मौत देखकर अल्लाह प्यारा

प्यास ने शाहे-वक्त़ को मारा।


जब भी अपने घर से निकलो

दुआ करो और दर से निकलो।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Raunaque Afroz

Similar hindi poem from Drama