आजादी का महोत्सव
आजादी का महोत्सव
घर घर तिरंगा लहराया
हमने आजादी का महोत्सव मनाया,
पर आज भी हमने स्त्रियों के लिऐ
अपने विचारों को बदल न पाया।
परदे में स्त्री रहे इस सड़ी गली मानसिकता के
आज भी हम गुलाम है,
75वें स्वतंत्रा दिवस पर हम स्त्रियों को
भी अपने हिस्से की स्वतंत्रता पाने की दरकार है।
न जाने कब स्त्रियों के जीवन में वो अमृतदिवस आयेगा?
जब सभी की नजरों में स्त्रियों को समान समझा जायेगा!
दिन हो या रात कहीं भी जाने का हो मुद्दा,
बिना डरे निकल सकें वो न हो कहीं भी उनकी असमत को खतरा!
मिल जायेगी जब उन्हें इस तरह की सुरक्षा
सच तब आजादी के मायने होगें,
तभी हम पूरी तरह आजादी का महोत्सव
मनाने लायक के काबिल होगें।
