आज जाने की जिद्द ना करो.....
आज जाने की जिद्द ना करो.....
आज जाने की ज़िद्द ना करो,
यूँ ही पहलू में बैठे रहो,
हाय मर जायेंगे,
हम तो लुट जायेंगे,
ऐसी बातें किया न करो
मजबूर कुछ ऐसे थे के
जागते दिनों में हम तो मिल ना सके,
मुहब्बत कुछ ऐसी रहीं, जो सोयी रातों में
आकर तुम तो मिलते रहें,
यूँ सपनों में ही आकर, तुम कहीं दूर जाकर
अब यूँ छुपा ना करों
आज जाने की ज़िद्द ना करो,
यूँ ही पहलू में बैठे रहो,
हाय मर जायेंगे,
हम तो लुट जायेंगे,
ऐसी बातें किया न करो
तरसते जिस्म को तेरे बाहों में
मिटा के आज रख हैं दिया,
तेरी ही साँसो को, अपने जिस्म से महका हैं दिया,
मेरी खूशबू को बदल के कपड़ो को,
अपने जिस्म से अब यूँ ना मिटाया करों
आज जाने की ज़िद्द ना करो,
यूँ ही पहलू में बैठे रहो,
हाय मर जायेंगे,
हम तो लुट जायेंगे,
ऐसी बातें किया न करो
तेरे चेहरे को हमने सुबह की पहली किरण हैं बना लिया,
रात की चाँदनी में भी, तनहा ना तुम बिन खूदको पाया,
तेरी खामोश पलों से बहुत से सहम जाते हैं हम,
लड़ते रहों फिर जिंदा रह लेंगे हम,
छोटी-छोटी बातों पर यूँ अब रूँठा ना करों
आज जाने की ज़िद्द ना करो,
यूँ ही पहलू में बैठे रहो,
हाय मर जायेंगे,
हम तो लुट जायेंगे,
ऐसी बातें किया न करो
तुम ही सोचो जरा, क्यूँ हैं जिंदा अबतक हम,
छोड़ कैसे चले जाये, जो साथ रहने का वादा था किया,
दूर जाकर दुबारा लौट आती तो
मेरी साँसों से तुम यूँ ही अब शिकायत ना करों
आज जाने की ज़िद्द ना करो
यूँ ही पहलू में बैठे रहो
हाय मर जायेंगे
हम तो लूट जायेंगे
ऐसी बातें किया न करो
