Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Amit Kumar

Abstract Classics Fantasy


4.0  

Amit Kumar

Abstract Classics Fantasy


आज बरसों बाद

आज बरसों बाद

1 min 190 1 min 190

आज बरसों बाद ये सुबह देखा 

जैसे रोते को कहीं हँसता देखा।


दिन रात बीते और बीते महीने भी,

एक मुद्दत में आज आईना देखा।


सब भूले थे रोटी-वोटी के चक्कर मे,

भूख तो थी नही, जब आखिरी सपना देखा।


लालसा दिल मे थी कि कुछ तो कर लूँ मैं

पूरा हुआ सब, फिर भी अधूरा देखा।


बचपन से जवानी और बाद उसके भी,

रोज़ मर मरके भी खुद को जीता देखा।


समझे सदा सब, पर नासमझी ही रही,

अक्सर देर में खुद को समझते देखा।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Amit Kumar

Similar hindi poem from Abstract