STORYMIRROR

Umesh Shukla

Tragedy

4  

Umesh Shukla

Tragedy

आज बहुत हलकान

आज बहुत हलकान

1 min
1.0K

विप्र धेनु सुर संत सब

आज बहुत हलकान

झूठे दावे सुन सुनकर ही

पक रहे इन सभी के कान

सच सुनने के लिए अब

राजनेता कहीं नहीं तैयार

ऐसे में जन पीड़ाएं बढ़ रहीं

ज्यों सुरसा का बढ़ा आकार

जनता को एक बार फिर नए

अंजना नंदन की ही तलाश

कालनेमि का वध कर बढ़ा

सकें मानवता का प्रकाश।


સામગ્રીને રેટ આપો
લોગિન

Similar hindi poem from Tragedy