STORYMIRROR

अमित प्रेमशंकर

Abstract

3  

अमित प्रेमशंकर

Abstract

आए जीवन बार-बार

आए जीवन बार-बार

1 min
280

आए जीवन बार-बार 

ना आए मानवतार

हरे राम और हरे कृष्ण 

तू जपले बारंबार।


यहां रहा न राज मराठा

रहा न राज दरबार 

हरे राम और हरे कृष्ण

तू जपले बारंबार।


मोह माया बेईमानी चोरी 

छोड़ दे तू अहंकार 

हरे राम और हरे कृष्ण 

तू जपले बारंबार।


हाथ पांव न बांधे बैठो 

तू कुछ कर मेरे यार 

हरे राम और हरे कृष्ण

तू जपले बारंबार।


कुछ आए ना आए 

करना सीखो सबसे प्यार

हरे राम और हरे कृष्ण 

तू जपले बारंबार।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract