STORYMIRROR

Abhilasha Chauhan

Abstract

4  

Abhilasha Chauhan

Abstract

आए हैं ऋतुराज वसंत

आए हैं ऋतुराज वसंत

1 min
319

लो आ गए ऋतुराज वसंत,

हवा में घुलता है मकरंद।

फूल उठी है सरसों पीली,

वसुधा लगती नई-नवेली।


पुष्प खिले हैं डाली-डाली,

भ्रमर करें उनकी रखवाली।

तितली उड़ती रंग-बिरंगी,

कोयल ने फूँकी सारंगी।


वृक्षों ने किया नव श्रृंगार,

प्रीत में लतिका बैठी हार।

ऋतुओं के राजा हैं आए,

खुशियों संग साथ में लाए।


बहने लगी बयार बसंती,

प्रकृति भी हुई है फुलवंती।

प्रेम की बहती है रसधार,

फागुन, फाग के संग फुहार।


उड़ता है रंग और गुलाल

राधा लाल-लाल लिए गाल,

राधा-कृष्ण गोपी औ ग्वाल।


खेतों में फसलें मुस्काई,

झूमें कृषक फसल घर आई।

कवि छेड़ता अब मीठी तान,

कविता की खिल उठी मुस्कान।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract