२०२१ कोरोना का कहर
२०२१ कोरोना का कहर
कोरोना, मैंने हार नही मानी है
मैं नारी हूँ, कभी ना हारी हूँ,
पाषाण पिघलाकर मैं बहा देती दुग्ध- धारा,
प्राण अपना दाँव पर लगा मै बनती प्राणदा,
समक्ष प्रतिकूल- अनुकूल परिस्थिति जो हो,
पोषण कर ही लेती अंकशायिनी अपने अंग अंश का,
त्रृलोकी शिकस्त जहाँ हो जाते है,
मैं जीत के जश्न का आगाज वही से करती हूँ,
क्योंकि हर युग मे मेरी यही कहानी है,
पर मैंने कभी हार नही मानी है,
हाँ कभी था मेरा देश परतंत्रता की बेडी मे जकड़ा हुआ,
पर तब भी रण - जौहर मे कुद पड़ी थी ,
कभी लक्ष्मी बाई तो कभी मैं बनी पद्मिनी थी,
भोग्या भार्या से बन गयी मै योध्दा वीरांगना थी,
क्योंकि एक नया इतिहास मुझे बनाना था,
मैंने तब भी हार नही मानी थी,
माना आज मेरा हिंदुस्तान तुझसे हुआ किंचित निर्बल,
कोरोना भले आज तेरी शक्ति हुई प्रबल,
पर मै भी बनी देवदुत् हूँ स्वयम खीच लक्ष्मण रेखा अविचल,
क्योंकि मेरे अटल विश्वास की तरंगे कहती है,
कोरोना, मैंने अब तक हार नहीं मानी है।
