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चेतना प्रकाश चितेरी , प्रयागराज

Inspirational

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चेतना प्रकाश चितेरी , प्रयागराज

Inspirational

आओ ! गुस्सा त्यागें

आओ ! गुस्सा त्यागें

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आओ! गुस्सा त्यागें,

 हम प्रेम– सौहार्द की बातें करें।


कुछ खट्टी, कुछ मीठी,

यादों के साथ,

मैं तेरे दिल में बस जाऊंगी,

जब मुझे तू याद करेगा ,तो

मैं चाहकर भी ! 


तेरे पास वापस न आ पाऊंगी,

सब छोड़ चली जाऊंगी,

कल किसने देखा है ?

आओ ! गुस्सा त्यागें,

हम प्रेम सौहार्द की बातें करें।


जिंदगी! चार दिन की है,

जाने कौन ! कितने दिन का मेहमान,

आओ ! अपनी खुशियां, अपनों के साथ बांट लें,

अगर,मन में कोई गांठ हो, तो उसे खोल दो !

एक –दूजे के साथी हैं ,

हम दूसरे का सहारा बने,

आओ ! गुस्सा त्यागें, हम प्रेम– सौहार्द की बात करें।


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