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मकड़ जाल  भाग  1
मकड़ जाल भाग 1
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© Mahesh Dube

Thriller

2 Minutes   7.4K    17


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मकड़ जाल  भाग 1

               दोपहर दो बजे खबर आई कि वसई के किले में एक खंडहर से भयानक बदबू उठ रही है। पुलिस तुरंत हरकत में आई। मौका-ए-वारदात पर जाकर देखा तो एक फटे हुए बोरे में से आधा इंसानी जिस्म बाहर निकला हुआ था। आधा हिस्सा अभी बोरे में ही था। बाहर निकले हुए आधे हिस्से को बुरी तरह नोंचा खसोटा गया था। शायद जंगली जानवरों ने रात को खूब दावत उड़ाई होगी। शव का पंचनामा करके लाश उठवाई गई और पड़ताल शुरू हुई। किसी अभागे को कहीं और मारकर उसकी लाश बोरे में भरकर यहाँ फेंक दी गई थी। अगर कल रात जंगली जानवर भोजन की तलाश में बोरा फाड़कर लाश का तिया पांचा न कर देते तो न जाने कब तक लाश बोरे में बंद वहीं पड़ी रहती।जूनियर कॉलेज के कुछ विद्यार्थियों का ग्रुप मौज मस्ती के लिए किले में घूमने गया था जब उन्होंने वहाँ के नीरव वातावरण में भयानक दुर्गन्ध महसूस की। वे दुर्गन्ध की अधिकता से मितली-सी महसूस करने लगे थे इसलिए बोरे के नजदीक नहीं गए पर किसी अनहोनी की आशंका से भरकर उन्होंने लौटते समय पुलिस चौकी पर सूचना दी जिसके फलस्वरूप पुलिस वहाँ गई और लाश अपने कब्जे में लेकर लौट आई और अब उसकी शिनाख्त और कातिल को पकड़ने का कठिन काम उसके सामने मुंह बाए खड़ा था। 

         जांच का काम नौजवान सब इंस्पेक्टर विशाल शुक्ला को सौंपा गया।  विशाल पढ़ा लिखा ज़हीन नवयुवक था। कई दूसरे क्षेत्रों में नौकरी की तलाश में असफल रहने के बाद उसने एक दिन अखबार में पुलिस भर्ती का विज्ञापन देखकर आवेदन दे दिया और तुक्का लग गया। बुद्धिमान होने के नाते उसने अपने सीनियर वीरेंद्र सिंह की कई मामलों में अच्छी सहायता की थी। सिंह साहब उससे काफी प्रसन्न रहते थे इसीलिए उन्होंने विशाल को इस केस का स्वतंत्र इंचार्ज बनाकर रहस्य की परतें उधेड़ने को कहा। विशाल ने भी प्राणपण से इस पहले केस को हल करने का निश्चय कर लिया।  

क्या वह अपने काम में सफल हुआ?

कहानी अभी जारी है...

पढ़िए भाग 2

रहस्यकथा

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