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अंगूठा छाप
अंगूठा छाप
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© Yogesh Suhagwati Goyal

Drama Inspirational Others

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सौंखर नाम के गाँव में एक श्रीमानजी परभाती लाल रहते थे | उनके पिताजी के पास बेशुमार दौलत, जमीन और जायदाद थी | उसके साथ ही वो उधार देनदारी का काम भी करते थे | शायद ये एक ख़ास वजह थी जिसके कारण परभाती लाल जी को खुद कभी कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ी | कालेज या यूनिवर्सिटी तो बहुत दूर, उन्होंने कभी गाँव के स्कूल की शक्ल भी नहीं देखी | पढने लिखने से उनका दूर दूर तक वास्ता नहीं था | सारा गाँव उन्हें अंगूठा छाप के नाम से जानता था |


परभाती लाल के पिताजी गाँव के मुखिया थे | सभी से उनके अच्छे सम्बन्ध थे | उनका परिवार गाँव के इज्जतदार परिवार में गिना जाता था | अपने गाँव में ही नहीं, बल्कि आसपास के सभी गांवों में उनकी अच्छी धाक थी | इसी के चलते परभाती की शादी एक अच्छे इज्जतदार परिवार की पढ़ी लिखी लड़की सुशीला से हो गयी | ज़िन्दगी बढ़िया कट रही थी | गाँव में और भी कई लोगों के नाम परभाती थे | मगर जब भी सुशीला के पति श्री परभाती लाल जी से सम्बंधित कोई बात होती तो लोग अंगूठा छाप बोलकर संबोधन करते थे | यहाँ तक कि कई लोग ये भूल चुके थे कि उनका असली नाम परभाती लाल है |


शादी के दो साल बाद, परभाती लाल जी और सुशीला के घर में पुत्र पैदा हुआ | पति पत्नी दोनों ने आपसी सहमति से बेटे का नाम रोशन लाल रखा | परभाती लाल जी को बेटे की पढाई लिखाई में कोई दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन सुशीला पढ़ाई का महत्व अच्छी तरह समझती थी | सुशीला ने बेटे की पढाई पर शुरू से ख़ास ध्यान दिया | रोशन एक होनहार और बुद्धिमान लड़का था | गाँव के स्कूल से शिक्षा ख़त्म कर शहर के कालेज में पहुँच गया | यहाँ भी रोशन ने अपना नाम रोशन किया और सबसे अच्छे अंक हांसिल किये | रोशन को शुरू से ही अर्थ शास्त्र में दिलचस्पी थी | इसी के चलते आगे की पढ़ाई के लिये लन्दन चला गया |


रोशन हर २-३ दिन में अपने माँ बाप से टेलीफोन पर बात करता था | यूं तो वो अपने माँ और बाप दोनों को ही बहुत चाहता था लेकिन कुछ बातें वो सिर्फ अपनी माँ से ही साँझा कर पाता था | इसकी एक मात्र वजह माँ का पढ़ा लिखा होना और पिता का अनपढ़ होना था | माँ उसकी हर बात में दिलचस्पी लेती थी और उस पर अपनी प्रतिक्रिया भी देती थी, जबकि वही बातें पिता की जानकारी और समझ के बाहर थी | इसी कारण माँ और बेटे दोनों एक दूसरे के ज्यादा करीब आ गए थे | साथ ही पिता और पुत्र धीरे धीरे दूर होते जा रहे थे | अपने पुत्र से दूरी परभाती लाल को खलने लगी थी | उससे बर्दाश्त नहीं होती थी | परभाती लाल को जल्द ही ये समझ आ गया कि इस दूरी का मुख्य कारण उसका अशिक्षित होना था |


और उसी दिन से, अंगूठा छाप ने सिर्फ अपने परिवार में ही नहीं, बल्कि सारे गाँव में शिक्षा के महत्व और प्रसार का जिम्मा उठा लिया | 

पढ़ाई समाज पिता बेटा

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