STORYMIRROR

Richa Baijal

Drama

3  

Richa Baijal

Drama

मेरे मन की होली

मेरे मन की होली

3 mins
223

होली की सुबह थी वो। गुनगुनी धूप बालकनी में गिर रही थी। सुबह की रौशनी में रंग बिरंगे गुलाल का हवा में उड़ना उस सुबह को रंगीन बना रहा था। रूबल अपनी बालकनी में खड़ी चाय की चुस्की ले रही थी। उसकी पलकों में गंभीरता थी और दुनिया भर को समझ लेने का इत्मीनान। ३५ साल की उम्र , शादी की कोई जल्दी नहीं थी उसको , और लबों पर एक शरारत भरी थी। सफ़ेद रंग की शार्ट -ड्रेस पहनी थी उसने।

"हे मारिया, हैप्पी होली ",- छत पर ही से मुट्ठी भर गुलाल उठा कर हवा में उड़ा दिया था उसने। और खिलखिलाकर हंस पड़ी थी।

"हैप्पी होली ,दीदी "- नीचे से एक आवाज़ आयी थी।

रूबल अब अपनी बालकनी पर टिक कर बैठ गयी थी। यहाँ से वो सभी को देख पा रही थी ; हंस रही थी ,खिलखिला रही थी। हाथों में भर भर कर गुलाल उड़ाने से उसकी ड्रेस रंग-बिरंगी होकर और खूबसूरत लग रही थी। रूबल ने साइड की टेबल से सिगरेट निकाला। उसके कश भरकर वो हवा में उड़ा रही थी। उसकी बालकनी पर बजते म्यूजिक को उसने लाउड कर लिया था। और वो हल्का - हल्का नाच रही थी। उसके घुंघराले बाल उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। नीचे गिरे गुलाल से उसके पैर रंग गए थे।

"रूबल ,अमित आया है "- माँ की इस आवाज़ से रूबल कुछ सहम गयी थी। उसने म्युज़िक कम किया और बालकनी में बचा हुआ सिगरेट फेंक कर जल्दी से अपने कमरे में आ गयी।

"हैप्पी होली ,रूबी ",अमित माँ की साथ उसके कमरे में आ गए थे।

"हैप्पी होली , अमित ", उसने अपने बिस्तर में बैठे बैठे ही कहा था। अचानक से वो कुछ समझ ही न पायी थी। अपने नंगे पैरों को छुपाने की लिए वो बिस्तर में आकर बैठ गयी थी। 

"तुम दोनों बैठो ,मैं चाय लाती हूँ ", माँ ये कहकर कमरे से बाहर चली गयी थीं।

"आई स्टिल लव यू ,रूबी ", अमित ने उसका हाथ पकड़ कर कहा था।

रूबल मुस्कुरा दी थी.... एक फीकी हंसी। वो बिस्तर से उठी ,उसने हरा गुलाल एक मुट्ठी में भरा था ,वापस अमित तक आयी और वो हरा रंग उसके चेहरे पर लगाया। बचा हुआ रंग उसने बेबाकी से हवा में उड़ा दिया। इस वक्त उसका कमरा रंग से भर गया था।

"हैप्पी होली अमित......., लेकिन अब तुम जाओ। और कुछ बाकी नहीं है अब।"

"रूबी ,बात को समझने की कोशिश करो।" - अमित ने अपने कपड़ों को झाड़ते हुए कहा था।

"न वक्त है फ़िलहाल ,और न तबियत है मेरी अब ये समझ पाने की कि चार साल बाद तुम क्या लेने आये हो अमित ?"-कहकर रूबी ने पास पड़ी व्हिस्की की बोतल से पेग बनाना शुरू कर दिया था "लोगे ?" - उसने बेहद इत्मीनान से पूछा था।

"ये क्या पागलपन है रूबी ? ये छोटे कपडे , और अब ये दारू ? पागल हो गयी हो क्या तुम ?"- अमित ने चीखकर कहा था।

"तुम ये हक़ खो चुके हो ...।", कहकर रूबल ने एक घूंठ मुँह में भर लिया था।

"हाँ ...। अब बहुत बदल गयी हो रूबल। मैंने गलती की यहाँ आकर।"- कहकर अमित मुड़ने को उठा और उसके कदम बाहर की तरफ बढ़ रहे थे।

"इस बार बहुत जल्दी समझ में आया अमित , तुमको।" 

"गेट लॉस्ट ,बेबी।"- कहकर रूबल ने अपनी बालकनी का दरवाज़ा फिर से खोल दिया था।

"छप्पाक।"

रूबी ने बालकनी से कलर की पूरी बाल्टी अमित पर खाली कर दी थी।

"हैप्पी होली अमित।।। " - वो बालकनी पर से चीख रही थी।

"फ़क।।" - कहकर अमित अपने गीले कपड़ों की तरफ देख रहा था। छोटे बच्चे उसके आस पास इकट्ठा होकर' हैप्पी होली अंकल ','हैप्पी होली अंकल' चिल्ला रहे थे। 

और उधर 'रूबी ' की बालकनी से हरे रंग का गुलाल उड़ कर हवा में घुल रहा था। और उसकी बेबाक खिलखिलाहट होली की रंगो को और खूबसूरत बना रही थी।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Drama