Garima Mishra
Abstract
समर्पण के धागे में लिपटे
कुछ रिश्तों के प्राण हैं
वो ही पहला अक्षर मेरा
वो ही पूर्ण विराम है!!
वो ही मेरा उगता सूरज
वो ही ढलती शाम है
सांसों से जाना है मैंने
"मात-पिता" ही प्राण है
उनके चरणों में ही बसता मेरा
हर तीर्थ, हर धाम है।
प्रेम से मुक्...
शाम, नज़्म, औ...
कलम की आख़िरी...
मेरी चाहत की ...
स्याही
मसला इश्क़ नह...
कोई ना था, बस...
तुम कहो, क्या...
बेचैनी में सु...
नारी अनंतकाल ...
है पूजा मैथिली ने और सुमन से सजाया, है हिन्दी के भवन में, दुर्गा तेरा उजाला। है पूजा मैथिली ने और सुमन से सजाया, है हिन्दी के भवन में, दुर्गा तेरा उजाला।
वक्त का क्या मौका ये आए न आए, कि ढह चला है किला दरार के साथ। वक्त का क्या मौका ये आए न आए, कि ढह चला है किला दरार के साथ।
वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना ! वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना !
सृष्टि के संचालन में अहम् भूमिका है, एक पिता का होना ----------- सृष्टि के संचालन में अहम् भूमिका है, एक पिता का होना -----------
अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्रियां ? अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्र...
जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो। जीवन के बाद शायद परीक्षाओं का अंत हो, हर मौसम लगे जैसे बसंत हो।
भक्तिमार्गी को राह मिलन की, 'काफ़िर' दिखला गया। भक्तिमार्गी को राह मिलन की, 'काफ़िर' दिखला गया।
आज्ञा पाकर शिव शंकर से सती पिता के घर तो आ गई। किंतु पिता के मुख से पति का अपमान सती स आज्ञा पाकर शिव शंकर से सती पिता के घर तो आ गई। किंतु पिता के मुख से पति का अप...
रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी पीठ थपथपाया रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी ...
इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व। इस भौतिक संसार में, धन का बहुत महत्व।
ज़िंदगी कब सरल थी हुई, कब मैं इतनी विरल थी हुई ज़िंदगी कब सरल थी हुई, कब मैं इतनी विरल थी हुई
तेरे हर सवाल का जवाब देना बाकी है अभी, जिंदगी तेरा कर्ज़ चुकाना बाकी है अभी। तेरे हर सवाल का जवाब देना बाकी है अभी, जिंदगी तेरा कर्ज़ चुकाना बाकी है अभी।
पल-पल रखते उनका ध्यान, एक दूजे पर छिड़के जान।। पल-पल रखते उनका ध्यान, एक दूजे पर छिड़के जान।।
और मेरे अक्षरों में, तुम्हारे सुख को पलीता लगाते हुए तीखे सवाल हैं! और मेरे अक्षरों में, तुम्हारे सुख को पलीता लगाते हुए तीखे सवाल हैं!
अपने बच्चे को गर्भनाल से अलग नहीं कर पाएगी। अपने बच्चे को गर्भनाल से अलग नहीं कर पाएगी।
ओ जाना फिर मैं क्यों बदलूँ अन्त मे बस मैं यही कहूँगा ना बदला हूँ ना बदलूँगा। ओ जाना फिर मैं क्यों बदलूँ अन्त मे बस मैं यही कहूँगा ना बदला हूँ ना बदलूँ...
मन की सारी बात बताना ए दोस्त तू कल फिर आना. मन की सारी बात बताना ए दोस्त तू कल फिर आना.
मुझे मायका बनाना है अपनी ससुराल को मुझे मायका बनाना है अपनी ससुराल को
जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया । जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया ।
लोग कहते माँ मुझे पर मैं बड़ी असहाय हूँ॥ लोग कहते माँ मुझे पर मैं बड़ी असहाय हूँ॥