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कोई खिलता फूल गुलाब हो आप !
कोई खिलता फूल गुलाब हो आप !
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© Akarshan Sharma

Fantasy Others Romance

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कोई खिलता फूल गुलाब हो आप – कुछ मीठी सी सौगात हो आप,

हो सूरज की इक पहली किरण – या ढलती चांदनी रात हो आप.

हो शाम का कुछ ठहरा मौसम – या सावन की बरसात हो आप,

हो बातें खूब जुबां की कहीं – तो कहीं खामोश ज़ज्बात हो आप.

कहीं बेकरारी की फितरत – कहीं जीने का अंदाज़ हो आप,

कहीं बेतहाशा हो समुंदर – कहीं इक प्यासे की प्यास हो आप.

कहीं आँखों का हो नजारा – कहीं अनजाना कोई राज़ हो आप,

कहीं वक़्त के जैसे चलता हुआ – कहीं ठहरा रात का चाँद हो आप.

कहीं अनसुलझे से हो मौसम – कहीं सुलझे हुए जस्बात हो आप,

है मेरे अपने खूब यहाँ – पर मेरे लिए कुछ ख़ास हो आप ||

खिलता फूल गुलाब हो आप

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