STORYMIRROR

Laxmi Dixit

Abstract

2  

Laxmi Dixit

Abstract

दोहा

दोहा

1 min
57

चोट लगी रोया नहीं,

बहुत बड़ा तू धीर।


भोले को रमता रहा,

भूल गया सब पीर।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract