STORYMIRROR

Garima Mishra

Abstract

2  

Garima Mishra

Abstract

चाहत राधा सी

चाहत राधा सी

1 min
144

तुम रखना चाहत राधा सी

मैं कान्हा बनकर आऊँगा!!


अंधकार में जब तुम होंगी

मैं जुगनू बन छा जाऊँगा


धूप तपा देगी जब राह को

मैं शीतल जल बन बह जाऊँगा


विपरीत लगे जब तुम्हें परिस्थिति

मैं तुम को राह दिखाऊँगा


तुम रखना चाहत राधा सी

मैं कान्हा बनकर आऊँगा!!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract