इबादत सी मोहब्बत
इबादत सी मोहब्बत
मैंने किसी का टूट कर चाहना देखा है
उसका फिर आज़माना देखा है
मैंने लोगों का टूट कर बिखर जाना
देखा है!!
इबादत सी है उसकी मोहब्बत आज भी
मगर कहाँ गया वो शख्स
जिसे उसने ख़ुदा माना है!!
ऐसी मोहब्बत से बेहतर तड़प कर
मर जाना है
जिन्हें हर साँस में मर मर कर जीना है
हर रात उन्हें रोना है... हर दिन फिर
मुस्कुराना है
गुनाह की सज़ा, गुनाह करने वाले
को ही पाना है!!
