STORYMIRROR

Kahkashan

Abstract

2  

Kahkashan

Abstract

मेरी मां

मेरी मां

1 min
271


माँ के बिन लगता नही, सुंदर ये संसार

जीत मुझे यूँ लग रही, मानो मेरी हार


मानो मेरी हार, ख़ुशी न मुझे सुहाती

मेरी माँ की याद, मुझे हर पल तड़पातीl


होते क्यों कमज़ोर, बहुत रिश्तों के धागे

जग लगता वीरान, सच कहूँ अब बिन माँ के।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract