माँ की ममता
माँ की ममता
पग पग साथ निभाती है निराश न होने देती है
एक माँ ही है जो कभी हमको न रोने देती है
आँचल से लगा लेती है गोदी मे सुला लेती है
दुआओं से भरा कर सिर धर नव हौसले देती है
हाथ पकड़कर मेरा चलना सिखाया माँ ने
वो काले टीके से मुझ पर की कु-नजरें देती है
माँ करुणा नेह की नगरी अमृत का गागर है
रंग भरकर नए नए वो ख्वाब सलोने देती है
माँ का तो हर रूप है प्यारा बिल्कुल ईश्वर सा
भोली सी माँ मेरी मेरे दर्द से ख़ुद ही रो देती है
माँ की मेहनत कोशिश से बन जाते हैं हम
सारे दर्द ख़ुद सहकर हमको उड़ाने देती है
माँ की ममता-दुआयें रहती साथ सदा आईना
मुसीबतों जब-जब बचती हूँ मैं ये जान लेती हूँ।
