Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
काश मैं भी चाँद होती
काश मैं भी चाँद होती
★★★★★

© Rewa Tibrewal

Romance

1 Minutes   1.3K    5


Content Ranking

हर रात जब मैं

अपनी बाल्कनी खोलती हूँ तो

चाँद मुस्कुराते हुए

मुझे चिड़ाता है ,

कभी हँसाता है

कभी समझाता भी है ,

कभी नज़रे चुरा कर

हौले से थपकी दे कर

सुला देता है ,

कभी मुझे अकेलापन महसूस हो तो

अपने होने का एहसास दिलाता है ,

कभी कभी तो अपनी चाँदनी

के साथ होने की वजह से बहुत इतरता है

और तब वो पूरा नज़र आता है,

अपनी चाँदनी की रौशनी

हर तरफ बिखेरता है ,

हाँ पर किसी दिन जब वो

मेरे साथ लूका छीप्पी खेलता है तो

फिर लाख ढुंढ़ो कहीं नज़र नही आता ,

काश! मैं  भी चाँद की तरह होती

बस अपनी चाँदनी के साथ

हर हाल मे खुश होती ,

और दूसरो को भी खुश रखती !

चाँद तन्हाई एहसास

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..