STORYMIRROR

मानव सिंह राणा 'सुओम'

Abstract

4  

मानव सिंह राणा 'सुओम'

Abstract

कुहासा किरण

कुहासा किरण

1 min
400

कुहासा किरण

बन गई जिंदगी

तू गईं या

मिल गईं जिंदगी


सब तो मना रहे है

जन्मदिन यहाँ

मुझे लगता है

तू गई जिंदगी


वो पैमाने वक़्त के

छलक गए जिंदगी

कभी भरे कभी खाली

तड़फ गए जिंदगी

सब तो मना रहे

है खुशियाँ जिंदगी

मुझे लगता है

तू गईं जिंदगी


गमों की बरसात

अब भई जिंदगी

खुशियों की उड़ान

अब गई जिंदगी

कल तक थे दुःखी

वो खुश आज हैं

मुझे लगता है

तू नहीं जिंदगी

कुहासा किरण

बन गई जिंदगी....



ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Abstract