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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Others

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Dhan Pati Singh Kushwaha

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प्रभु प्रेरणा बल दीजिए

प्रभु प्रेरणा बल दीजिए

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मुझको प्रभु दीजिए वह प्रेरणा और बल,

लेश भी न हो द्वेष हो अनुराग बस केवल।

मैं दे सकूं निज नि:स्वार्थ प्रेम सभी को अपना,

मित्र-शत्रु में भेद किए बिना पूरा हो सपना।


प्रभु कृपा कर भर दो मन में दृढ़ इरादा,

जिस दिल में मेरे प्रति वैर उसको ज्यादा।

देना प्रभो वह शक्ति मुझको जीतूं यह रण,

वाणी से कहना न हो बोले केवल आचरण।


काम सबके आ सकूं मुझे वह मनोवृत्ति दीजिए,

सुपथ से भटकूं नहीं सद्वबुद्धि प्रभुजी कीजिए।

प्रभु तेरे दिए लक्ष्य की आजीवन ही करूं मैं साधना,

भूलूं न मैं उसे हो अगणित बाधाओं से मेरा सामना।


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