STORYMIRROR

Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Others

3  

Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract Others

प्रभु प्रेरणा बल दीजिए

प्रभु प्रेरणा बल दीजिए

1 min
328

मुझको प्रभु दीजिए वह प्रेरणा और बल,

लेश भी न हो द्वेष हो अनुराग बस केवल।

मैं दे सकूं निज नि:स्वार्थ प्रेम सभी को अपना,

मित्र-शत्रु में भेद किए बिना पूरा हो सपना।


प्रभु कृपा कर भर दो मन में दृढ़ इरादा,

जिस दिल में मेरे प्रति वैर उसको ज्यादा।

देना प्रभो वह शक्ति मुझको जीतूं यह रण,

वाणी से कहना न हो बोले केवल आचरण।


काम सबके आ सकूं मुझे वह मनोवृत्ति दीजिए,

सुपथ से भटकूं नहीं सद्वबुद्धि प्रभुजी कीजिए।

प्रभु तेरे दिए लक्ष्य की आजीवन ही करूं मैं साधना,

भूलूं न मैं उसे हो अगणित बाधाओं से मेरा सामना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract