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Abhishek Singh

Abstract

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Abhishek Singh

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माँ की मोहब्बत..!

माँ की मोहब्बत..!

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रहने दिया न भूखा,

जब मैं न था पृथ्वी पर।

माँ जैसी मोहब्बत,

कहाँ इस धरती पर।


हर दर्द सह लेती,

बदले एक ख़ुशी के।

मिलता कहाँ ऐसा सुकून,

बदले तेरे आँचल के।


वक़्त कितना भी हो बुरा,

माँ बदले तेरी एक झलक।

फिर क्या मजाल क़िस्मत की,

जो वक़्त न बीते तेरी रहमत  से।


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