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Kanchan Hitesh jain

Inspirational

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Kanchan Hitesh jain

Inspirational

व्यवहार कौशल होना जरूरी हैं

व्यवहार कौशल होना जरूरी हैं

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रमेश और रंजना मुबंई शहर में नये थे। जिस मुहल्ले में उनका घर था वहां के लोग बहुत मिलनसार और एक दूसरे के सुख दुख में काम आये वैसे थे ,लेकिन रमेश का स्वभाव इसके विपरित था। उसे किसी से मिलना जुलना बात करना बिलकुल पसंद नहीं था। ना ही उसको रंजना का किसी से दोस्ती करना पसंद था। वह सिर्फ अपने काम से काम रखता।

एक दिन की बात थी उसके पड़ोस में एक बूढ़ी दादी और दादा रहते थे सारे मुहल्ले वाले उन्हें दादी ही बुलाते रविवार का दिन था दादी की तबियत कुछ नरम थी दादा किसी काम से बाहर गये हुये थे शाम होते होते दादी की तबियत बिगड़ने लगी वह दर्द से कराह रही थी। रंजना ने कई बार कहा "रमेश मूझे लगता है दादी की तबियत ठीक नही है और शायद वे घर में अकेली है हमें उनकी मदद करनी चाहिए", रमेश ने गुस्से में आकर कहा.." किसकी दादी कौन दादी तुम लोगों के मामले में टांग अड़ाना बंद करो और अपने काम पर ध्यान दो।"

उसका स्वभाव और बातचीत करने का तरीका भी बड़ा सख़्त था और अपनी इसी आदत की वजह से वह आये दिन लोगों से झगड़ा भी करता रहता।

कुछ समय बाद रंजना माँ बनने वाली थी जैसे तैसे समय बितता गया और नौ महीने पूरे हुये। अब उसे हर वक्त किसी की मदद की जरुरत रहती रमेश तो सुबह सवेरे काम पर निकल जाता और रात को ही वापस आता लेकिन रमेश के सनकी स्वभाव की वजह से कोई उनके घर में झांकता तक नही था।

एक दिन अचानक रंजना को लेबर पेन शुरू हो वह दर्द से चिल्ला रही थी दादी अनुभवी थी जैसे ही आवाज़ सुनी उसकी मदद के लिए आई और उसे अस्पताल ले गई। फोन करके रमेश को भी सीधे अस्पताल बुलाया।

बधाई हो आपको बेटी हुई है आज अगर इनको अस्पताल लाने में थोड़ी भी देर हो जाती आपके बच्चे और बीवी दोनों की जान को खतरा था।

रमेश को अपनी ग़लती का एहसास हुआ वह जैसे ही दादी से माफ़ी मांगने गया। दादी ने कहा .."मुझे माफ़ करो बेटा मुझे तुम्हारे घर में तांक झांक नहीं करनी चाहिए थी लेकिन मैं भी एक बेटे की माँ हूँ और एक माँ होने के नाते उस समय जो मुझे ठीक लगा मैंने किया।"

रमेश का सर शर्म से झुका हुआ था। उसके आँखों में पश्चाताप के आँसू थे। आज उसे अपनी ग़लती का एहसास हुआ उसने दादी से माफ़ी मांगते हुये कहा.. "माफ़ी आपको नहीं मुझे मांगनी चाहिए। मैं तो आपकी माफ़ी के लायक भी नहीं हूँ। उस दिन सब कुछ जानते हुये भी मैंने आपकी मदद नहीं की लेकिन आज आपने बिना किसी नाराज़गी के हमारी मदद की। मैं सदैव आपका ऋणी रहूंगा।"

तो दोस्तों मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। कोई भी व्यक्ति अकेला नहीं रह सकता, क्योंकि अकेला रहना बहुत मुश्किल है।अगर हम समाज से जुड़ेगे नहीं लोगों से बात ही नहीं करेंगे तो हमेशा के लिए अकेले रह जायेंगे। सामान्य तौर पर लोगों के असफल होने का कारण उनका व्यवहार होता है। यदि हम अपना व्यवहार बेहतर कर लेंगे और दूसरों को प्रभावित कर पायेंगे तो लोग स्वतः ही हमारी ओर आकर्षित होंगे और सफलता निश्चित है।



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