वृक्ष हमारे देव
वृक्ष हमारे देव
संसार में मनुष्य , जो अपने विचार से सही गलत का अनुभव तथा अपने आप पर प्रकाश डालता है मनुष्य का कर्तव्य उसको बांधकर रखना है। परंतु जानवर जो किसी के सहारे विलास तो विदा की बिन आंसू वाली व्यवहार से समझा जा सकता है उन्हें क्या आवश्यकता है पृथ्वी जो हमें जानती तक नहीं तब भी हमें आपको रहने खाने की आजादी दी है हमारा भी कर्तव्य है पृथ्वी के संतुलन को बनाए रखना इसी में संसार का हिट है।
दुनिया में सदियों से चलती आ रही है लड़ना झगड़ना परंतु यह गंभीर यहां हो जाती है जब आपसी मतभेद के कारण हम अपने सहयोगी की हत्या कर देते हैं वह सहयोगी जो जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा जिसके बिना हमारा जीवन अधूरा है तब भी हम बिना सोचे समझे बम मिसाइल से भारी कई गंदगियों से इसे भर देते हैं वृक्ष पर उतार दिया जाता है देश के विकास के नाम पर हजारों लाखों पेड़ों को काट दिया जाता है परंतु इसको बिना कटे भी हम अपने कार्य को सफलतापूर्वक संपूर्ण कर सकते हैं लेकिन चल रही इस महामारी की दौड़ में लोग अपने स्वार्थ में लिन सब कुछ खो बैठते हैं।
जिस प्रकार यह मनुष्य यह काम कर रहा है यह एक विश्व के लिए बिना कपड़ों वाला दृश्य कहलाएगा एक पेड़ और जीवित प्राणी का तुलना समान ही है परंतु अंधेर नगरी चाल चलन में खोए हुए मनुष्य यह भूल जाते हैं एक पेड़ की कीमत हमारी उम्र से भी बड़ी है पृथ्वी को नीला ग्रह इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी सतह पर लगभग 71% हिस्सा पानी से ढका हुआ है लेकिन अधिक से ज्यादा पानी जो पीने उपयोग नहीं है और हमारे लिए कुछ ही शेष पानी ऐसा है जो हमारे लिए पीने योग्य हैं 71 हिस्से में से जो बचता है लगभग 97% इस में से खारा पानी और लगभग 3% मीठा पानी होता है 97% में से समुद्र का पानी आदि आते हैं मीठे पानी में प्रयुक्त 3% हैं जो मीठे पानी पीने योग्य हैं,
बर्फ का पानी जो लगभग 6.8 परसेंट है जो सीधे रूप से नहीं मिलता वही भूमिगत पर पानी लगभग 30% है जो कई कई जगहों पर मिलता है परंतु हर जगह उपयोग नहीं है नदियों झीलों का पानी संपूर्ण रूप से लगभग दो प्रतिशत है यह हर जगह मिल सकता है लेकिन पानी गंदगियों से ढका हुआ है।
कुछ नदियां ऐसी भी हैं जो पीने योग्य हैं परंतु गंदगियों से ढकी हुई हैं जैसे गंगा जमुना नील परंतु आजकल अत्यधिक प्रदूषण यही है व्यक्ति का मूल अधिकार तथा कर्तव्य यही कहता है कि अपने आसपास की नदियों तथा क्षेत्र को साफ सुथरा रखें जैसे अपने आप को रखते हैं अपने घर अपने कपड़े को संपूर्ण रूप से स्वच्छ रखने हैं वैसे ही हमारा कर्तव्य बनता है की नदियों झीलों को हमें स्वच्छ रखना चाहिए।
रेगिस्तान में पानी तथा वृक्ष दोनों की कमी है वृक्ष एक नाम नहीं हमारे कई पीढियां का जीता जागता उदाहरण है जैसे हम अपना प्रजाति बढ़ाते हैं वैसे ही यह भी समय-समय पर अपना प्रजाति को उत्पन्न तथा बढ़ती रहती हैं , लगभग 100 में से दो चार ही स्वतंत्र रूप से एक वृक्ष बन पाते हैं जब यह छोटे उत्पन्न होते रहते हैं तभी जानवरों के द्वारा इन्हें खत्म कर दिया जाता है जब यह उत्पन्न होकर एक सफल वृक्ष बनते हैं उनकी परीक्षा यहां भी खत्म नहीं होती इन्हें मनुष्य से बचाना पड़ता है जहां सबको रहने का अधिकार है लेकिन संसार के मनुष्य उन्हें बिना संतोष के काट देते हैं वह भूल जाते हैं कि जिन्हें हम काट रहे हैं वह हमारे लिए बहुत आवश्यक है।
हर एक मनुष्य के उम्र से 10 - 12 वर्ष हर एक वृक्ष बड़ा होता है ,मनुष्य भूल जाते हैं कि एक वृक्ष को उत्पन्न होने में कितने वर्ष और समय लगता हैं एक वृक्ष को सफल वृक्ष बनने में एक मनुष्य ज्यादा काम तथा निष्ठा रखना पड़ता है तब जाकर विशाल शानदार वृक्ष तैयार होता है।
जिस प्रकार एक पिता तथा पिता के पिता का अस्तित्व एक वृक्ष से जुड़ा होता है वैसे ही संपूर्ण जीवन वृक्ष से ही जुड़ा है,
कभी बातें करो हरे - नन्हे पौधे से तो शायद यही कहेगा में तुमसे नहीं तुम्हारी आने वाली पीढियों से बातें कर रहा हूं?
- अभिषेक गुप्त
