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Arun Gupta

Horror


3  

Arun Gupta

Horror


वो कौन

वो कौन

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सुनो ! यहाँ ज़्यादा बाहर भी निकलना मैने सुना है यह क्षेत्र ठीक नहीं सरला ने अपने पति और बेटे की ओर देखते हुए कहा। यह हमारे शहर जैसा नहीं की रात मे कितने भी बजे तक बाहर घूमो यह गाँव है समझ आया। रोहन ने, सरला की ओर ध्यान से देखते हुए "क्या मम्मी आप मुझे डरा रही हो " में कोई छोटा बच्चा नहीं अब मैं बड़ा हो गया हूँ मेरी उम्र सोलह वर्ष की हो गयी है।

मुझे किसी से कोई डर नहीं लगता, रोहन ने मुँह टेड़ा करते हुए कहा... 

रोहन के पिता राजेश, सरला से बोले तुम भी ना फालतू ना डराया करो हम यहाँ गाँव मे छुट्टी बिताने आये हैं यहाँ तो और खूब मस्ती करेंगे अपने खेत देखेंगे और रात मे गाँव के लोगों के साथ ताश खेलेंगे और रोहन मे यहाँ के लोगों को जान पायेगा, तुम हमें डराओ नहीं।

सरला बोली देखो जी, ऐसा है मैंने सुना है यहाँ कोई वैम्पायर है जो रात के समय लोगों को उठा ले जाता है और उनका खून पी जाता है, थोड़ी देर पहले ही मुझे हमारे पड़ोस मे रहने वाली ये अम्मा बता रही थी की किसी को रात मे बाहर नहीं जाने देना, कोई है जो लोगों को पकड़ रहा है और उन्हें मार देता है कुछ दिन पहले ही सिर कटी लाश मिली है किसी की, अब मुझे नहीं पता यह सच है या नहीं लेकिन अगर सच है तो इससे बुरा कुछ नहीं, सरला ने डरते हुए कहा.. 

रोहन बोला मम्मी आप भी कहाँ सबकी बातों मे आ जाती हो, अब यह कुछ नहीं होता यह तो सब बनावटी बातें है कुछ नहीं होता।

सरला बोली हाँ हाँ ठीक है, तुम जानो तुम्हारा काम, जब तुम्हें वो वैम्पायर मिलेगा तब पता चलेगा, हम्म... सरला यह कहते हुई रसोई घर में चली गयी।

शाम को रोहन और उसके उसके पिता राजेश खेत पर गए, वहाँ रोहन ने पहली बार टूबवेल देखा, रोहन ने वहाँ पर बहुत मस्ती की और देखते ही देखते अँधेरा हो गया 

राजेश बोले अरे ! रोहन जल्दी घर चलो अँधेरा हो गया है।

रोहन बोला अरे पापा चलता हूँ बस दो मिनट और, 

राजेश ने हाँ, हाँ जल्दी करो, 

रोहन बोला, जी पापा 

फिर दोनों घर की ओर चल दिए, थोड़ी दूर ही चल पाए थे खेत से तभी उन्होंने एक कुत्ते को पड़ा देखा जिसका सर नहीं था यहाँ वहाँ खून पड़ा था।

कुत्ते को देख कर रोहन चिल्लाया, पापा इसका सिर कहाँ है ?

इसे किसने मारा ?

 राजेश बोले अरे, डरो मत आया होगा कोई भेड़िया जो इस पर हमला कर के इसका सिर ले गया होगा l अब चलो जल्दी घर।

रोहन और उसके पिता राजेश दोनों घर पहुँचे, और सभी ने रात का खाना खाया और रोहन अपने बिस्तर पर जा कर लेट गया, वो और उसी कुत्ते के बारे में सोचने लगा। 

रात के दो बजे थे, कुत्तों के भौंकने की आवाज़ बहुत तेज़ आ रही थी रोहन को कुछ समझ नहीं आया और यह आवाज़ लगातार सुबह पाँच बजे तक आती रही तभी अचानक पूरे गाँव में शोर मच गया, सब तेज़ से चिल्लाये, अरे! यह किसका शव है ?

राजेश और रोहन दोनों दौड़ कर पहुँच गए उन्होंने देखा वो लाश किसी बूढ़े व्यक्ति की थी और उसका गला कटा हुआ था और यहाँ वहाँ खून पड़ा था।

राजेश ने पूछा यह किसका शव है?

रामवती बोली अरे शव की पहचान तो तब हो जब इसका मुंह दिखे, इसका मुंह ही कुचल दिया दिया और ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने इसके गले पर काटा हो और सारा खून पी लिया हो।

वहाँ किसी को कुछ समझ नहीं आया तभी रामबाबू ने लाश को बहुत ध्यान से देखा और बोला अरे ! यह तो हुलसी है यह बेचारा पास के ही दूसरे गाँव में रहता है, इसके बेटे दूसरे शहर में रहते है, यह यहाँ अकेला रहता था। 

हे ! भगवान यह क्या हो रहा है ? ना जाने कौन आ गया है ऐसा जो खून पी रहा है।

रोहन बहुत डर गया।

राजेश ने कहा देखो मुझे तो लगता है कोई जानवर है जो ऐसा कर रहा है।

रामबाबू बोला अरे नहीं बाबू, आप तो शहर से आये हो आपको कुछ नहीं पता, यह जानवर का काम नहीं है 

अगर जानवर का काम होता तो वो इसका शरीर का मांस खाता केवल खून ही नहीं पिता देखो ! कैसा पीला पड़ गया है यह, मुझे तो लगता है वो वैम्पायर फिर आ गया है।

राजेश बोला कौन फिर आ गया है ?

क्या पहले भी ऐसा हुआ था ?

रामबाबू बोला हाँ साहब अब से दस साल पहले भी ऐसा ही कुछ हुआ था, बहुत लोगों की जान गयी हम सभी ने कुछ दिनों के लिए यह गाँव छोड़ दिया था और पास के गाँव में चले गए थे, कोई अपने रिश्तेदारों के यहाँ चला गया था फिर कुछ दिन बाद हम वापस आ गए।

क्या करते किसी के यहाँ कितना रुका जा सकता है, लेकिन फिर कोई घटना भी नहीं घटी और अब कुछ दिन से फिर यह सब शुरू हो गया 

राजेश ने कहा यदि ऐसा है तो हम सब को बहुत ध्यान से रहना होगा, हम ऐसा भी कर सकते है की हम मे से कुछ लोग रात मे पहरा दें जिससे जो भी हो वो पकड़ा जाये , और किसी की ऐसे जान ना जाये।

सभी बोले हाँ यह ठीक रहेगा अब पाँच लोग रोज पहरा देंगे।

सभी ने हुलसी का अंतिम संस्कार कर दिया, और अपने अपने घर चले गए।

सरला ने राजेश से कहा देखो मुझे लगता है बस हो गयी छुट्टियाँ ख़त्म अब हमें अपने शहर चलना चाहिए मैं नहीं चाहती की हमारे साथ कुछ भी गलत हो 

राजेश बोला तुम डर रही हो, अरे यह गाँव वाले अनपढ़ लोग है मुझे लगता है कोई गाँव का ही आदमी है जो यह सब कर रहा है तुम देखना मैं उसे बहुत जल्दी पकड़ लूँगा और पूरा गाँव मेरी तारीफ करेगा.... राजेश ने मुस्कुराते हुए कहा 

सरला बोली मुझे लगता है यहाँ ठीक नहीं है तुम क्यों नहीं समझते।

राजेश ने कहा ठीक है तुम बस दो दिन मुझे यहाँ और रुकने दो फिर चलेंगे।


आज मेरी ड्यूटी लगी है पहरेदारी पर, राजेश ने सरला से कहा 

इतना सुनते ही सरला बोली तुम पागल हो गए हो, तुम्हें कुछ हो गया तो मैं क्या करूँगी, नहीं, नहीं... तुम नहीं जाओगे और कोई करे पहरेदारी लेकिन तुम नहीं करोगे।

राजेश बोला अरे! तुम डरो नहीं कुछ नहीं होगा मुझे देखो मैं आज ही उसे पकड़ लूँगा और मैं कोई अकेला नहीं करूँगा पहरेदारी मेरे साथ और भी लोग हैं गाँव के।

सरला बोली मैं कुछ नहीं जानती तुम नहीं जाओगे बस, चाहे कोई भी जाये 

राजेश बोला अगर सब यही सोचेंगे फिर क्या होगा, मुझे मेरा काम करने दो 

राजेश ने अपना डंडा उठाया और बाहर चला गया, उसके साथ गाँव के ही कुछ लोग और भी थे सभी लोग यहाँ वहाँ टहलने लगे तभी संजय तेज़ से चिल्लाया जो राजेश के साथ पहरेदारी कर रहा था 

वो देखो ! कोई है वहाँ सफ़ेद कपड़े पहने है उसने 

राजेश और संजय दोनों उसकी तरफ भागे लेकिन वहाँ कुछ भी नहीं था, राजेश बोला लगता है तुम्हें नींद आ रही है या कोई वहम है चलो यहाँ से कोई नहीं है दोनों वापस मुड़े और चलने लगे और एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए तभी संजय के चेहरे पर खून की कुछ बूँदें गिरी संजय खून देखते ही डर गया, वो राजेश से बोला देखो यह खून कहाँ से आया संजय ने जब पेड़ के ऊपर की ओर देख तो वहाँ एक सिर कटी एक बच्चे की लाश लटक रही थी यह देख संजय तो बेहोश हो गया राजेश तेज़ से चिल्लाया अरे ! अरे जल्दी आओ इसे भी मार दिया पता नहीं यह किसका बच्चा होगा।

पूरा गाँव एकत्र हो गया, संजय के मुंह पर पानी डाला गया संजय को होश आ गया और फिर लाश को नीचे उतारा, लाश के नीचे आते ही संजय की पत्नी फूट फूट कर रोने लगी अरे मेरे लाल को मार दिया, अरे मेरे लाल को मार दिया....... 

राजेश बोला क्या तुम्हारे घर मे गया था कोई ?

संजय की पत्नी बोली नहीं, जब यह बाहर आये तब यह भी इनके पीछे पीछे दौड़ा चला आया, मुझे लगा यह अभी लौट आएगा और कोई ज्यादा समय भी तो नहीं हुआ है इसे घर से निकले हुए अभी क्या रात के 11 बजे है मुझे लगा इन्हीं के साथ होगा यह इसे घर वापस छोड़ जायेंगे 

सरला उस बच्चे के शरीर को देखते हुए बोली, देखो ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने इसका खून पी लिया हो, इसका शरीर बिल्कुल पीला पड़ गया है 

पूरा गाँव अब परेशान था अब क्या होगा ? कहीं अगला नम्बर हमारा ना हो 

राजेश बोला चिन्ता नहीं करो, जो भी है ज़रूर पकड़ा जायेगा और मैं उसे ऐसी सज़ा दूँगा ज़िंदगी भर याद करेगा मुझे लगता है अगर यह बच्चा घर के बाहर नहीं आता तो इसे कुछ नहीं होता उसने इसे अकेला और कमजोर समझ कर हमला कर दिया लेकिन वो मुझसे नहीं बचेगा 

राजेश बोला ऐसा है अब घर के दरवाज़े बंद कर लो और कोई भी घर से बाहर नहीं निकलेगा।

संजय ने रोते हुए कहा मुझे नहीं लगता यहाँ पहरेदारी से भी कुछ होगा, मैं आप सभी से विनती करता हूँ सभी शाम होते ही अपने घरो मे रहो और कोई भी कुछ भी कहे लेकिन दरवाज़ा ना खोलो और हाँ इस पहरेदारी से भी कुछ नहीं होगा। सभी अपने अपने घरों मे ही रहो। मैं नहीं चाहता कोई मेरी तरह अपना बेटा खोये, और तेज़ से रोने लगा.. 

सभी अपने अपने घरों में चले गए और पूरे गाँव मे सन्नाटा था।

सुबह को उस बच्चे का अंतिम संस्कार किया गया, संजय की पत्नी का तो रो रो कर बुरा हाल था पूरे गॉव मे दहशत का वातावरण बन चुका था।


सरला ने राजेश से कहा अब मैं यहाँ एक मिनट भी नहीं रुकूंगी तुम अभी शहर चलो, रोहन भी बोला हाँ पापा यहाँ से चलो यहाँ रहना ठीक नहीं 

राजेश बोला, अगर हम आज चले गए अभी तो लोग हम पर हँसेंगे।

सरला ने थाली पटकते हुए कहा तुम पागल हो गये हो तुम्हें इज़्ज़त की चिन्ता है हमारी नहीं।

राजेश बोला ठीक है तुम समान रखो करो हम कल सुबह ही निकल जायेंगे।

सरला जल्दी जल्दी समान रखने लगी।


शाम हो चुकी थी, पूरे गाँव मे सन्नटा, अब तो कुत्ते भी नहीं बोलना चाहा रहे थे।

सरला बोली मुझे तो बहुत डर लग रहा है बस आज की रात कट जाये, और फिर सभी खाना खा कर सो गए 


रात के 12 बजे थे, रोहन को डर के वजह से नींद नहीं आ रही थी।

रोहन पानी पीने के लिए उठा, उसने ग्लास मे मटके से पानी लिया और पीने लगा तभी उसे एक सफ़ेद कपड़े पहने कोई दिखाई दिया, रोहन के हाथ से ग्लास छूट गया और वो तेज़ से चिल्लाया.... मुझे मत मारो, मुझे मत मारो...... 

रोहन के आवाज़ सुन कर सरला और राजेश भी उठ गए।

राजेश ने देखा की कोई सफ़ेद कपड़े पहने 7 फ़ीट का कोई उसके बेटे को ऊपर उठाये हुए है। रोहन के पैर ज़मीन से दो फ़ीट ऊँचे उठे हुए थे और रोहन हवा में था और ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रहा था मुझे छोड़ दो, मुझे छोड़ दो......... 

यह देख सरला उसकी तरफ दौड़ी और चाकू से उस सफ़ेद कपड़े पहने वैम्पायर पर ज़ोरदार वार किया लेकिन उसके कुछ नहीं हुआ उस वैम्पायर ने सरला को ज़ोर से धक्का दिया।

सरला दीवार से जा टकराई, राजेश उस वैम्पायर से हाथ जोड़ कर विनती करने लगा मेरे बेटे को छोड़ दो,... छोड़ दो 

लेकिन वैम्पायर ने एक ना सुनी और तेज़ दांतो से रोहन के गर्दन पर काटा और खून पीने लगा।

राजेश को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था वो रोता चिल्लाता रहा।

फिर वैम्पायर ने रोहन के गर्दन को उसके धड़ से अलग कर दिया और उसकी गर्दन को राजेश के मुंह पर फेंका रोहन के गर्दन राजेश के मुंह से जा टकराई, इससे राजेश बेहोश हो गया।

लेकिन सरला को बहुत गुस्सा आया लेकिन वो कुछ नहीं कर पायी।

रोहन का सब खून पीने के बाद उसने उसे छोड़ दिया और सरला की ओर बड़ा, सरला ने कहा तुम मुझे खा लेना रोहन के बिना मैं जीना नहीं चाहती लेकिन तुम ऐसा क्यों करते हो कौन हो मुझे बताओ।

वो बोला मुझे इंसान, जानवर का खून अच्छा लगता है, पहले लोगों ने मुझे बहुत परेशान किया अब मैं लोगों को कर रहा हूँ 

तेज़ से बोला किसी को नहीं छोडूंगा चाहे कुछ भी हो जाए 

सरला ने दरवाज़ा खोला और बाहर की ओर भागी, बचाओ, बचाओ........ 

सभी गाँव वाले जाग गए सभी अपने घर से बाहर आ गए लेकिन तब तक वो वैम्पायर सरला का गला पकड़ कर उसे खेत मे घसीट कर ले जाने लगा सभी उसके पीछे भागे लेकिन वो अदृश्य हो गया और वहाँ सरला का सिर और बाकी का धड़ अलग अलग पड़ा मिला 

पूरा गाँव यह देख कर डर गया और सभी वहाँ से पलायन कर गए।


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