Akash Yadav

Abstract


3.0  

Akash Yadav

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वक्त अपना हिसाब लिखेगा

वक्त अपना हिसाब लिखेगा

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वक्त अपना हिसाब लिखेगा 

मेरे नाम का भी किताब लिखेगा 

मेरे मेहबूब मुझे खत मत लिखना 

मेरे पते पे अब तुझे दूसरा कोई मिलेगा 

मेरे लबो पे प्यास इतना है कि यारों 

कोई समुंदर इस प्यास को बुझा नहीं पायेगा

जलते चिरागो को बुझा दिया आँधियो ने 

इससे न कोई लड़ा है और ना कोई लड़ पायेगा !

 


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