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Priyanka Gupta

Drama Inspirational


4.5  

Priyanka Gupta

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विश्वास करो ,लेकिन अंधविश्वास नहीं

विश्वास करो ,लेकिन अंधविश्वास नहीं

4 mins 251 4 mins 251

"तुम पर विश्वास करना मेरी सबसे बड़ी गलती थी। मैंने तुम्हें दोस्त ही नहीं बहिन माना था और तुम ;मेरी ही ज़िन्दगी बर्बाद करने चली थी। डायन भी सात घर छोड़ती है। ", अंजलि रोती जा रही थी और कहे जा रही थी। 

"रूचि, तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया ?", अंजलि रूचि को झकझोरते हुए पूछ रही थी। 

"मैडम, यह तो इसका काम ही है। आप बच गयी ;शुक्र मनाइये। ", अंजलि को रूचि से अलग करते हुए महिला पुलिस अधिकारी ने कहा। 

 " रमेश, तुम यह कैमरा भी जब्त कर लो। पता नहीं दोस्ती के नाम पर इसने कितनी ही लड़कियों के न्यूड वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया है और कितनों की ही सीडी बनाकर बेची है। अभी तो इससे इसके सब साथियों का नाम उगलवाना है। ", पुलिस अधिकारी ने कहा। 

"कोई बात नहीं बेटा ;अब शांत हो जाओ। अंत भला तो सब भला। ", अंजलि के मम्मी -पापा ने उसे समझाते हुए कहा। 

"मम्मी -पापा, मुझे माफ़ कर दो। आपने कितना समझाया था कि किसी अनजान पर इतना भी भरोसा मत करो ;लेकिन मेरी आँखों पर तो दोस्ती की पट्टी पड़ी हुई थी। ", अंजलि ने अपने मम्मी -पापा के गले लगते हुए कहा। 

"लेकिन मम्मी -पापा आप यहाँ तक पहुँचे कैसे ?", अंजलि ने कहा। 

"बेटा, तुम रूचि की पार्टी में आने लिए घर नाराज़ होकर आ गयी थी। तब मेरा दिल नहीं माना और हम भी तुम्हारे पीछे -पीछे आ गए। ", मम्मी ने कहा। 

रूचि और अंजलि एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। अंजलि फर्स्ट ईयर में थी और रूचि फाइनल ईयर में थी। रूचि ने अंजलि को कई बार रैगिंग से बचाया था ; वह अंजलि को नोट्स आदि भी देती रहती थी। अंजलि ने देखा था कि, "अधिकांश प्रोफेसर रूचि को जानते थे।रूचि प्रोफेसर को विभिन्न अवसरों जैसे टीचर्स डे, उनके बर्थडे, दीवाली आदि पर महँगे -महँगे गिफ्ट देती रहती थी। "

अंजलि पर रूचि का रंग चढ़ता ही जा रहा था। वह सारा दिन रूचि -रूचि का राग का राग ही अलापती रहती थी। रूचि अकेले ही रहती थी। वह अकेले एक घर किराए पर लेकर रहती थी। अंजलि अपने मम्मी -पापा को कहती थी कि, "मम्मी -पापा, रूचि के पापा बहुत ही पैसे वाले हैं ;लेकिन फिर भी रूचि को ज़रा भी घमंड नहीं है। "


अंजलि के मम्मी -पापा को यह बात खटकती थी कि, "कितने ही पैसे वाले माँ -बाप हो ;लेकिन सभी माँ -बाप अपने बच्चों को पॉकेट मनी लिमिटेड ही देते हैं। "

फिर जब एक दिन रूचि अंजलि के घर आयी थी ;तब अंजलि के पापा ने रूचि से पूछा कि, "बेटा, तुम्हारे पापा क्या करते हैं ?"

तो रूचि ने तपाक से कहा, "मोबाइल हैंडसेट्स की दुकान। "

लेकिन फिर अपनी गलती समझ आते ही बोली कि, "अंकल, पापा इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सामान के होलसेलर हैं। "

अंजलि के पापा कुछ और पूछते, उससे पहले ही अंजलि रूचि को अपने साथ ले गयी थी। इस घटना के लगभग एक सप्ताह बाद ही अंजलि ने बताया कि, "मम्मी -पापा, आज शाम को रूचि की बर्थडे पार्टी है। अगर आते हुए देर हो जायेगी तो मैं उसके पास ही रुक जाऊँगी। "

"कहाँ है पार्टी ?", मम्मी ने पूछा था। 

"उसके घर पर ही है। ", अंजलि ने कहा। 

"नहीं, तुम नहीं जाओगी। वह लड़की हमें बहुत शातिर लगती है। ", मम्मी ने कहा। 

"आप क्राइम पेट्रोल देखना थोड़ा कम कर दो। ", अंजलि ने कहा। 

"कह दिया न, नहीं जाओगी। ", मम्मी ने कहा। 

अंजलि ने काफी गुस्सा किया, तब उसके पापा ने कहा, "जाओ ;अपना ध्यान रखना। "

"आपने उसे जाने क्यों दिया ?कुछ अनहोनी हो गयी तो। ", मम्मी ने कहा। 

"हम भी उसके पीछे जाएँगे। अगर उसे ज्यादा रोकते तो वह हमें अपना दुश्मन समझने लगेगी। भगवान् करे कि हमारी सारी आशंकाएँ निर्मूल साबित हो। ", पापा ने कहा। 

उधर अंजलि रूचि के घर पहुंची, तब वहाँ सजावट आदि तो थी ;लेकिन कोई भी नहीं था। 

"बाकी लोग कहाँ हैं ?", अंजलि ने पूछा। 

"हम दोनों दोस्त ही हैं। बाकी लोगों की क्या जरूरत। ", रूचि ने कहा। 

फिर दोनों बातें करने लगे ;रूचि ने केक काटा। फिर रूचि दोनों के लिए जूस बनाकर लायी। उसके बाद क्या हुआ ?अंजलि को पता नहीं था। 

"बेटा, रूचि के घर पर हमें कोई और नज़र नहीं आया तो हमें अजीब लगा कि यह कैसी बर्थडे पार्टी है ? हमने रूचि के गेट पर जाकर देखा तो वहाँ ताला लगा हुआ था तो पुलिस अफसर से मेरी दोस्ती है ही ;मैंने उन्हें मदद के लिए बुला लिया। ", पापा ने कहा। 

जैसे ही हम अंदर घुसे तो देखा कि, "रूचि वीडियो सेट कर चुकी थी और तुम्हारे कपड़े निकाल रही थी। ", मम्मी ने रोते हुए कहा। 

पुलिस अधिकारी ने उसे फ़ौरन पकड़ लिया और जब पूछा तो उसने बता दिया कि, "वह लड़कियों के न्यूड वीडियो बनाती है। "

"उसके बाद की तो सारी कहानी तुम्हें पता ही है। ", पापा ने कहा। 

"बेटा, विश्वास करो, लेकिन अंधविश्वास नहीं। ", मम्मी ने कहा। 

"मम्मी -पापा मुझे माफ़ कर दो। ", अंजलि ने एक बार फिर कहा। 

"चलो, घर चलें।" पापा ने कहा। 


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