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Rashmi R Kotian

Horror


3.5  

Rashmi R Kotian

Horror


वह अंधेरी बरसात की रात

वह अंधेरी बरसात की रात

13 mins 883 13 mins 883

यह घटना उस वक़्त की है जब मैं कर्नाटक के उडुपी में ए****स में काम कर रही थी। वहाँ कामसे घर वापस आते वक़्त सात आठ बजे हो जाती थी। मैं उस वक़्त गाड़ी आफिस नहीं ले जाती थी। बस से ही ऑफिस आया जाया करती थी। बस स्टॉप से घर तक 15-20 मिनट का रास्ता था। मैं अकेली आने से डरूँ ना इसीलिए पापा स्कूटर लिए मुझे ले जाने बस स्टॉप आते थे।

ऐसे ही एक दिन मैं बस से मैं ऑफिस से घर वापिस आ रही थी। जून का महीना था और उस दिन बहुत ज़ोर से बारिश हो रही थी। आफिस छोड़ते वक़्त सात बजकर 30 मिनट हो चुके थे। में बस से अपनी जगह मू*** पहुंच गई। वह जगह ज़्यादातर जंगल भरी इलाखा है। लेकिन अब बहुत जगहों में घर बने हैं। जब मैं बस स्टॉप पहुंची तो घड़ी में 8 बज चुके थे। ज़ोर से बारिश आ रही थी। छाते के होने के बावजूद पूरा शरीर भीग गया था। मैंने इधर उधर पापा को ढूंढा। लेकिन न पापा दिखे न उनकी गाड़ी।

हिम्मत जुटा कर 10 कदम आगे चली लेकिन पूरा अंधेरा छाया हुआ था। बारिश बहुत ही तेज़ रफ़्तार से ज़मीन पर पड़ रही थी। अंधेरा इतना था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। डर लगा। वापिस बस स्टॉप पर आके मैंने पापा को फोन लगाया।

" पापा कहाँ हैं आप ?क्यों नहीं आये मुझे लेने?"

" माफ करना चिन्नू बेटा. मैं जैकेट घर पे भूल गया। और यहाँ काम भी है। आते वक्त देर हो जाएगी । तुम माँ को फ़ोन लगाकर आने को बोलो। " उन्होंने मुझसे कहा।

और मैंने माँ को फोन लगाया। लेकिन माँ ने मुझे आगे जाने को बोला और कहा कि वह सामने आएगीं।

 मुझे बहुत डर लगा। सारा जगह अंधेरा ही अंधेरा!! कुछ दिखाई नहीं देरही। ऊपर से बारिश इतनी जोर से!

लेकिन जाना ही था। अंधेरे में डर न लगे इसलिए मैंने फोन पे ज़ोर से गाना चालू किया और कदम बढ़ाने लगी। मेरे घर जाते उस रास्ते में सिर्फ दो ही पथदीप हैं। शुरू में एक और अंत में दूसरा। उस रास्ते के बीच में एक सुनसान घर है जहाँ कोई नहीं रहता। इसलिए मू*** के लोगों का मानना है कि वहाँ और वहाँ के रास्ते में भूत प्रेतों का संचार है। वहाँ से जाते बहुत लोगों को अजीब अनुभव हुवें हैं। ऐसा वहाँ के बहुत लोग बोलते हैं।

 जब मैंने उस घर के बारे में सोचा तो मुझे बहुत डर लगा। आगे आगे चलते उस रास्ते के पहले पथदीप की रौशनी क्षीण होती गयी और फिर हर जगह अंधेरा छा गयी। मुझे और ज़्यादा डर लगने लगा इसलिए मैंने उसी जगह ज़रा दूर रहनेवाली अपनी सहेली को फ़ोन लगाया । उसके पास स्कूटर थी। मैंने सोचा मैं उसे स्कूटर लाने को बोलूँ और वह मुझे घर छोडदे। मेरी उस सुनसान घर के सामने से निकलने की हिम्मत नहीं थी। लेकिन दुर्भागय से मेरी सहेली को फोन नही लगा। नेटवर्क वीक हो गयी थी!!!

धीरे धीरे कदम बढ़ाते अभी तक न आये माँ को कोसते हुवे गाना ज़ोर से मोबाइल में सुनते बढ़ती गयी। कदम बढ़ाते वह सुनसान घर पास आ गया । तब दूरसे कोई इंसान चलते हुवे दिखाई दिया!!!!

 लेकिन जब मैंने गौर किया तब पता चला कि वे मेरे जान पहचान के व्यक्ति थे। लेकिन किसी कारण से हमारे और उनके परिवार के बीच अनबन्ध हुई थी जिससे हम लोगो का आपस मे बात चीत भी रुख गयी थी। मुझे भी वे व्यक्ति बिल्कुल अच्छे नहीं लगते थे लेकिन उस भयानक रात में उस भयानक जगह से गुजरते वक़्त दूर उन्हें देख मेरा डर बहुत कम हुआ। मैंने मोबाइल का गाना बंद किया। लेकिन वे मुझसे बहुत दूर थे। मेरा जल्दी जल्दी कदम बढ़ाने पर भी वे मुझसे काफी दूर थे। वह सुनसान घर आखिर आ ही गयी!!!

  लेकिन जब उस घर के सामने से में गुज़री तो अचानक पीछे से ज़ोर ज़ोर से किसी की चलने की आवाज़ें आने लगी!!!

   डर ने फिरसे मेरे शरीर पर कब्ज़ा कर लिया। उस जगह के बारे में जो सुना था और उसी जगह से गुजरते वक़्त हुवा यह अनुभव ने मुझे बहुत डरा दिया। लगातार मेरे पीछे से ज़ोर ज़ोर से कदमों की आवाज़ आही जा रही थी। ठीक से महसूस हो रहा था जैसे कोई मेरे पीछे चल रहा हो। मैंने सोचा कही बस कोई इंसान तो नहीं। एक बार देख लूँ! बहुत ज़्यादा हिम्मत झुटकार पीछे मुड़ी!!!

 लेकिन पीछे कोई नहीं था!!!

 मेरे दिल की दडकन एक क्षण में ऊपर चला गया!!!! पूरा शरीर कॉप उठा!!!

पीछे कोई नहीं! सिर्फ अंधेरा ही अंधेरा। बारिश का रफ्तार भी कम नही हुई थी। झपकसे मैं आगे मुड़ी और ज़ोर ज़ोर से कदम बढ़ाते चलने लगीं। तब जो कुछ पलों के लिए स्तब्ध हो गयीं थी वह कदमों की आहटें फिरसे सुनाई देने लगीं! फिरसे वह ही अहसास!!! जैसे कोई मेरे पीछे चल रहा हो । बुरी तरह घबराके सामने जाते हुए उस व्यक्ति को ज़ोर से "अंकल !!" कहके चिल्लाई! पूरी तरह डर गई थी।

 ना चाहते हुवे भी घबराहट में मैंने उस व्यक्ति को आवाज़ दी। वह अपने आप चल रहे थे लेकिन मेरी आवाज़ सुनके पीछे मुड़े । उन्हों ने दूर से ही पूछा कि क्या हुआ? लेकिन मुझे उनसे उस भयानक अनुभव के बारे में नहीं कहना था।  मैंने झिझकते हुवे बोला "कुछ नहीं!!" मेरा जवाब सुन वे व्यक्ति आगे मुड़कर फिरसे अपने आप चलने लगे। मैंने अपने चलने का रफ्तार बढ़ाया । चलते चलते उस व्यक्ति के पीछे पहुंच गई और कभी उनके दायें कभी बायें उन्हें फॉलो करते हुए चलने लगी।

   लेकिन अफसोस!! आगे आगे चलते मेरा दूसरा रास्ता आगया जहाँ से मुझे अकेले ही अपने घर जाना था। वे उस रास्ते में सीधे चले गये।

इस तरह उस भयानक रास्ते में जो हिम्मत देने केलिए साथी था उसे मैने खो दिया। अब तेजी से ज़मीन पर पड़ती बारिश की बूंदों को छोड़ उस रास्ते में कोई मेरा हमसफर ना बना।

  घर पहुंचने में अभी बस 5 मिनट का रास्ता था। लेकिन मेरी पैर हिल नहीं रही थी। गबराहट में पैर कांप रही थी। उस रास्ते के पथदीप की रौशनी में मैं अपनी ही परछाई देख घब्रागयी!!!

आगे चलने की हिम्मत नहीं हुई। सोचा छोटा रास्ता ले लूँ। इसलिए वहाँ के एक घर के सामने से गुजरने के बारे में मैंने सोचा लेकिन शार्टकट केलिए उस घर के गेट को खोलते ही ज़ोर से आवाज़ हुई जैसे किसी ने अपने एक कदम ज़ोर से ज़मीन पर पटक दी हो!!!!

ज़ोर से चिल्लाते हुए मैं घर के तरफ भागी। भागते हुए माँ का सामना हुआ। माँ ने मुझे घर लेजाकर टॉवल से मेरे भीगे शरीर और बालों को पोंछा और मुझसे मेरे डरने की वजह पूछा। मैं डर के मारे काँप रही थी। मैंने माँ को रास्ते में घटी घटना के बारे में कहा लेकिन माँ ने बोला कि यह सब मेरा वहम है , ऐसा कुछ नहीं।  उन्होंने मुझे फिर कहा ,इसी बारे मे सोचते में रातको नींद में चिल्लावू न!!

 मुझे रात को नींद में बोलने की आदत थी। बुरा सपना दिखे तो ज़ोर से चिल्लाकर माँ पापा को जगाती थी।

उस रात में फिरसे ज़ोर से चिल्लाई। लेकिन इस बार कोई बुरा सपना नहीं था। सच में कोई ज़ोर से मेरा गर्दन दबा रहा था। मैं उसे छुड़ाने के कोशिश करते हुए ज़मीन पर इधर उधर हात पैर हिलाते ज़ोर से चिल्ला रही थी। माँ पापा ने मुझे उठाकर मुझसे पूछने पर मैंने उन्हें सब कुछ कहा लेकिन वे लोग नहीं माने। उन्होंने कहा कि यह मेरा वहम है या बुरा सपना देखा होगा। मेरे बहुत कहने पर भी उन्होंने मुझे चुप चाप सोने के लिए कह दिया।

 अगले दिन में ऑफिस गयी। सुबह सब ठीक था लिकिन रात को फिरसे वही भयानक अनुभव हुआ। इस बार कोई और भी जोर से मेरा गर्दन दबा रहा था।  मेरी सांसे फूल रही थी। फिरसे मुझे चिल्लाते देख माँ पापा उठे । मैंने उनसे ज़ोर ज़ोर से रोते हुए कहा कि कोई मेरा गर्दन दबा रहा है । लेकिन पापा चिल्लाने लगे कि यह मेरे मोबीईल में हारर मूवीज देखने का नतीजा है और कुछ नहीं।

लेकिन अगले रात भी जब ऐसा ही हुआ तब माँ पापा दुविधा में पड़ गए। मैं उस रात और ज़ोर से चिल्लाई और उठाने पर फिरसे सोने को नहीं मानी। अगर सोती तो ज़रूर वह अनदेखी ताकत तो जैसे मुझे मार ही देती। माँ पापा ने मुझे पानी पिलाया और बहुत रात तक मेरे सात जगे रहे । मैंने अगले दिन ऑफिस की छुट्टी ली और सुबह तोड़ी सी सो गई , रात को जो पूरी जगी थी। पापा पंडितजी को मेरी कुंडली दिखाने सुबह गए थे। मुझे ऐसा लग रहा था कि उस दिन जो रास्ते में घटना घटी थी उसका उससे ज़रूर कोई संबंध था। पापा पंडितजी के यहाँ से दोपहर को खाने के वक़्त घर आये। आते ही जब उन्होंने पंडितजी की बात कही तो मैं और माँ दंग रह गए!!!

 पंडितजी ने बड़े निखर रूप से कहा था कि मू*** की उसी रास्ते में उसी वक़्त उसी दिन मैं कोरगा समुदाय के लोगों की दैव की रास्ते के सामने आ गयी थी। वह ही दैव मुझे रात को आके परेशान कर रही थी। यह सुनके हम चौंक गए क्योंकि पापा को उस दिन घटी वह घटना पता ही नही थी तो उस पंडितजी ने इतनी निखरता के सात कैसे कह दिया !यह करिश्मा था!!!

दैव!! कर्नाटक के मंगलोर और उडुपी(तुलुनाडू)के तुलुवा लोग दैव को मानते हैं। हर समुदाय के लोगों की अलग अलग दैव होतें हैं। मोगवीर लोगों के पंजूरली, बोबबर्य्य और बिल्लव लोगों की कोटि चेन्नया आदि। तुलुनाडू के लोग देवों से ज़्यादा इन दैवों पर यकीन रखते हैं । इन्हें वे "भूता" कहके भी पुकारते हैं। यह दैव रात को सवारी करते हैं तब अगर कोई उसके सामने आए तो उन्हें गुस्सा आता है और उस इंसान को उनके क्रोध का शिकार बनना पड़ता है।

 यह दैव अगर कोई भक्त पूजा में कोई कमी करें, या कोई मन्नत मांगकर उसे पूरा न करे या अगर एक बार उसपर आस्था रख फिर छोड़ दे तो अलग अलग प्रकार से अपने भक्तों को परेशान करते हैं। लेकिन अगर पूरी भक्ति के सात उनकी उपासना करें तो किसी भी मुसीबत से अपने भक्तों को बचाते हैं। दैवों की उपासना को तुलुनाडू में "भूताराधना" कहते हैं।

 पुराने ज़माने में लोग जब इन दैव सवारी के सामने गलती से आ जाते थे तब वहीँ ज़मीन पर झुकके दैव से माफी माँगते थे।

   एक दिन मेरी नानी और उनकी सहेलियाँ मलपे (उडुपी में एक स्थल) के मछली मार्केट से टोकरी मैं मछली लिए मलपे बीच से तोट्टम बीच के तरफ आ रहे थे। तब उन्हें दूर से कोई रौशनी आगे बढ़ते हुवे दिखी। पहले उन्होंने सोचा शायद कोई व्यक्ति टॉर्च लिए आ रहा है। लेकिन वह रौशनी के पास पास होते वह एक मनुष्य आकृति के जैसे दिखने लगी !

   नानी और उनके सहेलियों को पता लगा कि वह दैव है और वे उसके सामने आगए थे हालांकि वह उनसे हल्के दूरी में था। नानी और उनकी सहेलियों ने समंदर के किनारे पर रखी नॉव के पास भागा और वही टोकरी फेंक सभीने अपने साड़ी के पल्लू को हात में फैलाकर कहा ,

   

   " माफ करदे दैव , तुम्हारे रास्ते के सामने आए हम, हमसे गलती होगयी , माफ करदे!!" । वे सभी लोग नारियल के पत्तों से छत बनी उस नाव के कोने में बार बार ज़मीन पर माथा पटककर दैव के जाने तक माफी मांगते रहे। पुण्य से ना ही उन्हें ,न उनके घरवालों को कोई परेशानी हुई लेकिन उन्होंने अपनी घरोँ में दैव की पूजा करवाई ताकि इस घटना से कोई परेशानी न हो। इस तरह तुलुनाडू के लोग दैव से डरते हैं और उसकी उपासना करते है।

एक बार एक व्यक्ति रात को पेशाब करने के लिए बाहर आया तो उसने 3 बरस के एक बच्चे को सर में पगड़ी पहने हुवे रात के अंधेरे में पायल की छनछन आहट करते हुवे चलते देखा। जब उस व्यक्ति ने उस बच्चे का पीछा किया तो कुछ दूर जाकर वह गायब होगया। फिर उस व्यक्ति को हर जगह वही बच्चा ज़ोर ज़ोर से कर्कश स्वर में हँसते हुवे दिखाई देने लगा। वे इससे इतना परेशान हुवे की उन्होंने डिप्रेशन में पीना शुरू किया लेकिन फिरभी हर जगह उस बच्चे का दिखना और कर्कश हँसी का सुनाई देना बंद नही हुआ। फिर इससे वे सह नहीं सके और उन्होंने आत्महत्या कर ली।

फिर ज्योतिषी से पूछने पर पता चला कि उन्होंने दैव सवारी का पीछा करके जुर्रत की और उसकेलिए मांफी न मांगी और ना परिहार करवाया जिससे उनकी यह हाल हुई। उन्होंने अपनी सात होती अजीब अनुभव को सिर्फ अपने एक दोस्त से कहा था और उनके कहने पर भी कि यह दैव का मामला है और परिहार करवाना आवश्यक है; उहोने ने नहीं मानी और फिर उन्हें आत्महत्या करनी पड़ी। इस तरह दैव पर जो यकीन ना करे उन्हें वे परेशान करते हैं।

 रात को समुन्दर के किनारे आग का जलना और उसके आसपास बहुत से रौशनी का इधर उधर उड़ना , ऐसे दृश्य को बहुत तुलुवा लोगों ने देखा है। रात को दैव गण आग के पास नाचते हैं ऐसा प्रतीत है।

   मेरे सात जो घटना घटी उसकेलिए घर में एक बड़ी पूजा करवाई गई और मुझे हर रोज़ पहनने को पंडितजी ने विभूती दी। उसके बाद रात को कोई गर्दन दबाने की घटना नहीं हुई।

 मू*** के उस सुनसान घर के पास और भी बहुत लोगों को अजीब अनुभव हुवे हैं। एक बार मेरे पडौसी सहेली दिव्या का भाई दोपहर को जब स्कूल से उस रास्ते से गुज़र रहा था तब दूरसे उसे कोई पुरुष रास्ते के कोने में पेशाब करते हुवे दिखा लेकिन पास पास आते ही वह व्यक्ति नहीं दिखा। इस घटना के बाद उसका भाई उस रास्ते से दोपहर को अकेले आने से डरता था।

   हालहि में एक बार पापा को भी उस घर के पास अजीब अनुभव हुआ। उस रात वे 11 बजे उस रास्ते से आ रहे थे और उसी घर के पास रास्ते मे एक खरगोश कूदती हुई दिखी। मेरे पापा ने बिना कुछ सोचे कि वह जगह कितनी खतरनाक है वे स्कूटर को खड़ा करके खरगोश पकड़ने चले । तब ही पीछे से ज़ोर से आवाज़ आयी। पीछे देखा तो स्कूटर गिर गयी थी और झपक्के आगे देखा तो खरगोश गायब!!

   इतनी जल्दी खरगोश का भागना संभव नही था ना ही स्कूटर का गिरना जो इतनी सही तरीके से खड़ा किया गयाथा। पापा तुरंत वहाँ से घर आये और उस घटना को हमसे कहा। माँ पापा की हिम्मत से नाराज़ होगयी थी। लेकिन पापा ने हंसी मजाक में ही इस बात को कहा क्योंकि मू*** में उन्होंने इससे भी खतरनाक घटनाओं का अनुभव किया है।

मू*** में एक और सुनसान घर है जहाँ कोई नहीं रहता। रात को उस घर के सामने के रास्ते से अगर कोई एक या दो व्यक्ति स्कूटर में या चलते हुवे गुज़रता है तो वह घर आग लगी हुई नज़र आती है। अगर कोई सामने गया तो मर गया!!!

एक बार मेरे पिता के दोस्त और उनके दोस्त जोकि उस शहर में नये थे उस रास्ते से गुज़र रहे थे तब उन्होंने देखा कि घर पूरी तरह जल रही थी।

 उनके दोस्त (नए व्यक्ति) घबरागये और बोलने लगे,

" अरे घर में आग लगीं हैं चलो बुझानेवालों को बुलायें। "

" गाड़ी मत रोखिये , चलिए । आप इस जगह को नही जानते , यहाँ रात को अजीब घटना घटती है, अपनी जान बचानी हो तो दया करके गाड़ी भगाइये प्लीज " मेरे पापा के दोस्त चिल्लाने लगे तोे उन्होंने गाड़ी भगाया लेकिन उन्हें इस बात पर ज़रा भी यकीन नहीं था और अफसोस था कि उन्होंने घर को आग से नहीं बचाया लेकिन इसलिए मेरे पापा के दोस्त सुबह उसी जगह उन्हें लेकर आये और घर दिखाया तो वह बिना कोई आग के दाग के खड़ी हुई थी!!!

 इससे वह व्यक्ति चौंक गए थे और वहाँ के लोगों से पूछने पर उन्होंने कहा कि वहाँ बहुतों को घर का आग लगना दिखा है लेकिन जब ऐसा दिखता है तो अगर वे वहाँ रुके तो मौत को आह्वान देने के बराबर है। वहाँ बहुत लोग गुम हुवें हैं। ऐसा वहाँ के लोग बोलते हैं। इस तरह हमारे आस पास बहुत से अगोचर शक्ति, अजीब घटनाएं घटती है जो मानव को आश्चर्यचकित कर देते हैं।


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