Bhawna Kukreti

Drama Romance Fantasy


4.8  

Bhawna Kukreti

Drama Romance Fantasy


उसका खत आया है -2

उसका खत आया है -2

3 mins 207 3 mins 207

उसको जवाबी खत लिखने बैठा था। चाहता तो था कि लिखू "संभलो, आगे बढ़ो पर खुद की सख्सियत को खोते हुए नहीं।" लेकिन मैं जानता था ,ये पढ़ते ही वह टूट जाएगी, मुझ पर उसका विश्वास डगमगा जाएगा।उसके जहन में तमाम सवाल उठेंगे,जिसे वह मुझसे पूछना चाहेगी मगर पूछ नहीं पाएगी। सो ये ख्याल निकालते हुए एक छोटा सा खत लिख कर भेज दिया था।

खत भेजने के बाद जैसे मेरा पूरा वजूद उन सब बातों से भर गया है जो में उसे असल मे लिख भेज ना चाहता था। मुझे अपने आप से एक गंध सी उठती महसूस हो रही है। कमरे की खिड़कियां जैसे धीरे धीरे छोटी होती जा रहीं हैं। दीवारें और सीलिंग करीब आती लग रहीं हैं।

मैं पसीने से तरबतर हूँ और अपने कमरे से बाहर भाग आया हूँ। यहां अब जरा बेहतर लग रहा है। सांस में गंध कुछ कम हुई है। शाम हो रही है, सूरज डूब रहा है। मुझे उसका हाथ की पकड़ महसूस होती है, उसकी आवाज सुनाई देती है " सुनो ,उधर देखो तो ,दूर क्षितिज पर नारंगी रंग की डोरियां कैसे सूरज को हौले सेपाताल में उतार रहीं हैं।" मैं गौर करता हूँ ,तो लगता है कि कुछ पंक्षी भी उसी दिशा में बढ़ते जा रहे है।मैं कहता हूँ,"हाँ, और उन पंछियों की तरह अब तुमको भी अपने घर लौटना चाहिए समझीं!" में पलट कर उसे देखना चाहता हूँ।लेकिन वो वहां नहीं है, उसके हाथों की पकड़ को याद करता में अपनी बांह पकड़ लेता हूँ और आंखें बंद कर लेता हूँ। फौरन उसका उदास चेहरा मेरी आँखों के आगे घूमने लगता है, में मुस्कराते हुए हुए बाय करता हुआ कहता हूँ, घर पहुंचकर फोन कर देना मुझे।वो बस देखती रहती है और ओझल हो जाती है। 'वो ओझल हो रही है ' अचानक यह बात कौंध जाती है। मैं फिर अपने बदन पर अनकही बातों के कांटे महसूस करने लगा हूँ।

रात हो चुकी है, इनदिनों मेरे पास बहुत सारा काम भी नहीं है कि जिसमे डूब कर कुछ पल के लिए उसकी हर बात भुला दूं। कमरे में अंधेरा भर रहा है। मुझे याद आता है उसकी चन्द तस्वीरें है लैपटॉप पर। लैपटॉप पर 2℅ चार्ज दिख रहा है लेकिन मैं उसे नजरअंदाज कर उसकी तस्वीरों को देखता हूँ।

देखता हूँ, साल दर साल उसके चेहरे पर अलग अलग भाव दिख रहे है। ये तस्वीर,वो पहला साल जब हम बस परिचित ही थे। बहुत अलग सी है इसमें,पहचानी नही जा रही कहीं लॉस्ट सी।ये दूसरे साल जब हम बाते करने लगे थे,एक दो बार यूँ ही मिले भी थे। इसमे कैसी बेवकूफ सी कन्फ्यूज़ दिख रही है मगर कुछ खिल सी रही है। ये तस्वीर जब हमने काफी समय साथ बिताया था,कितनी लापरवाह और खुश है। और ये जब हमारी जिंदगियों में बदलाव आने लगे थे, यहां फिर कुछ अलग सी है,सवाल हैं आंखों में। और ये ,लोगों के बीच उसकी तस्वीर, ये मुझे एक ग्रुप से मिली थी। इसमे एक बनावटी हंसी है उसके चेहरे पर। ये और उसकी आखिरी गर्व से भरी तस्वीर जो मुझे पसंद नहीं है। बनावटी और अभिमानी लोग मुझे सख्त नापसंद हैं।

मैं नफरत से लैपटॉप बन्द करने चलता हूँ,लेकिन वह हैंग हो गया है, अब स्क्रीन पर उसकी आंखों में सवाल वाली तस्वीर है और रात मुझ पर हंस रही है बेतहाशा। मैं तैश में आकर  घर की सारी बत्तियां जला लेता हूँ।पूरे घर मे उजाला है लेकिन मन मे एक अंधेरा घर कर गया है।

ध्यान आता है, वो डरती है अंधेरे से, मैं अपने मन मे उसे खोजता हूँ। वो वहां नहीं है,इधर लैपटॉप बंद हो गया है। उफ्फ, अब उसकी शक्ल तक याद नहीं आ रही, मैं फिर बेचैन हो जाता हूँ, वो खो नहीं सकती। मन मे नहीं तो कहां है ? मैं फिर लैपटॉप खोलता हूँ लेकिन उसकी बैटरी ड्रेन हो चुकी है।


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