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Rajesh Kumar Chaurasia

Abstract Classics Inspirational

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Rajesh Kumar Chaurasia

Abstract Classics Inspirational

टूटी चप्पल

टूटी चप्पल

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ये कहानी सुखी की है। नाम से  सुखी , मन से सुखी। पेशे से मजबूरी ने मजूरी करने पे मजबूर कर मजदुर बना दिया। मजदुर जो दूसरे के खेतो मे काम करता। सुबह 6 से शाम के 5 बजे तक वो कड़ी धूप मे सूरज को चुनौती देता। सूरज की धूप उसके शरीर को तो जला सकती थी लेकिन उसके पेट की भूख को नहीं मिटा सकती थी। शाम को मिलीं ₹50 की कीमत कुछ ऐसी थी कि जैसे रेगिस्तान मे दिन भर भटकने के बाद किसी प्यासे को पानी मिल जाए। खाने को 2 रोटी कम खा ले लेकिन बेटिया को स्कूल जरूर भेजता। जो जिंदगी वो जी रहा है उससे बिटिया को मुक्त करना था। 

सुखी आज फिर काम पर निकल रहा है। सर पे फटा gamcha , शरीर पे phati bandi(vest), लुंगी और पैरों मे phati पुरानी chhapal जिसमें उसकी एड़ियां (heel) जमीन से जुड़ी हुई रहती। Chappal का फिता भी कई बार बीवी सील चुकी थी। घर से निकालते ही याद आया कि कल बिटिया को पढ़ाई के लिए स्कूल मे ₹30 फीस देनी है वर्ना मास्टरजी बिटिया को मुफ्त मे क्लास मे बैठने ना देंगे। सोच और हकीकत की जंग चल ही रही थी कि सामने पड़ा हुआ पत्थर ना दिखा और ठोकर लग गया और उसके दायें पैर की chappal टूट गई।

अब क्या करे बिचारा ? बिना chappal के काम कैसे करेगा। सूरज आज जीत जाएगा। सूरज उसको नंगे पाउ जमीन पे 1 पल भी खड़ा होने नहीं देगा। वो घर भी नहीं  जा सकता था। ₹70 नहीं मिली तो कल फीस नहीं दे पाएगा। काम पर जाना ही है सोच कर टूटी chappal पहन के बेचारा ghisat ghisat के चलने लगा। आज सूरज को कड़ी टक्कर मिलने वाली थी। सूरज भी देख लेगा की आग भले ही उसकी ज्यादा है लेकिन गरीबी की ताप सबसे बड़ी है। गाँव के बाहर निकला ही था कि देखा कूड़े के ढेर मे कुछ बच्चे प्लास्टिक की बोतल ढूंढ रहे है। ये देख कर सुखी उनके पास गया 

"का कर रहे हो वानर सेना ?" 

"कुबेर का खजाना है ये चाचा. आओ तुम भी धन लूट लो। का पता पारस मिल जाए। " 

"ना बाबु पारस की इच्छा नहीं है। लेकिन अभी बहुत छोटे हो तुम सब। कूडे मे मत भटक। इसकी बदबू तुम्हें बीमार कर देगी।"

"का करे चाचा ? ₹10 मिलता है 2 किलो कूडे पे. वो भी ना मिला तो घर का चूल्हा कैसे जलेगl ?" 

"चूल्हे के लिए जिंदगी ना जला।..निकलो यहां से।. बदबू मे दम घटेगी ". 

लड़कों को भगा कर सुखी पाऊ की उँगलियों के बीच chappal को कस के दबा कर चलने लगा. खेत मे जा कर chappal किनारे खोल कर काम शुरू किया। सूरज चुनौती को स्वीकार कर अपनी ताप बढ़ाने लगा। धरती गरम होने लगी। सुखी का अब नंगे पाउ खड़े रह पाना नामुमकिन होता जा रहा था। टूटी chappal के साथ वो काम नहीं कर पाएगा। ये सब से जुझ ही रहा था कि दूर 1 handpump देख कर उसको 1 उपाय सूझा। 2 पल काम कर वो nalke पे भाग जाता और अपने पैरों को पानी पिलाता और फ़िर वापस आ के काम करता। अब पाऊ ऊंट तो है नहीं की पानी की ठंडक को कहीं बचा के रख ले। सूरज 1 पल मे पानी को उड़ा देता भाप बना कर। आज का दिन बहुत लंबा लगने लगा था. लेकिन आज के लिए तो ये तरीका काम आ गया लेकिन कल अगर chappal नहीं पहना तो सूरज और भूख दोनों से जंग हार जाएगा। 

दिन का काम खत्म होने वाला था। आज सुखी ने सूरज को हरा दिया था। आज उसकी सबसे बड़ी जीत थी। दिन की दिहाड़ी ले कर सुखी बाजार की ओर चल पड़ा। हो सकता है बाजार मे कोई सस्ती chappal मिल जाए। लेकिन gisat gisat के चलता रहा तो बाजार भी बंद  हो जाएगी। इसीलिए वो चप्पल हाथ मे उठा कर नानगे पाऊ चल पाडा. दूर गाँव के कोने पर छोटा सा बाजार था कुछ ही छोटे दुकानों वाला। बाजार पहुँच के chappal की दुकान पर आया। बहूत रंग बिरंगी और फैशन के लोटे मे डूबी आँखों के रास्ते मन को लुभाने वाली कई chappale थी वहां। लेकिन सुखी की नजरें सबसे सस्ते वाले को ढूंढ रहीं थीं। 

"बाबुजी , वो वाली जोड़ी कैसे दिए ?" 

"₹30 के है वो " 

"बाबुजी इससे सस्ती कोई ना है ?" 

"इससे सस्ती क्या लोगे ? इससे क़ीमती तो ajkl घरवाली का गुस्सा है " 

"बाबुजी कोई पुरानी भी हो तो बताओ " 

"ये तुझे कबाड़ की दुकान लगती है क्या ? चल जा यहा से ? मुफ्त की बातें ना कर " 

Chappal ना खरीद सुखी मंदिर की ओर निकल जाता है। ₹30 chappal मे दे देता toh बिटिया को कल मास्टरजी स्कूल से ना निकाल दे। सुखी मंदिर की ओर निकलता है। 

सुखी मंदिर के बाहर chappal खोल के भगवान के दर्शन कर जैसे ही निकला अपनी chappal पहनने तो देखा वहां जैसे chappalo का मेला। इतनी chappal देख सुखी का मन 1 बार तो मचल गया। 

"एक chappal यहा से ले लू ?......... नहीं नहीं भगवान के दरवाजे से चोरी ठीक नहीं ……. लेकिन कल अगर chappal नहीं रही तो काम ना किया जाएगा …… 1 पुरानी से कोई देख के उठा लेता हू …… पर जिसकी है वो भी मेरी तरह नहीं खरीद पाया तो ? भगवान से माँगा तो है शायद वो कोई मदद कर दे।. किसी और की चीज नहीं लेनी … Laajo से बोल के फिर से सिल्वा लूँगा अपनी chappal… हाँ ये सही रहेगा " अब वो घर की तरफ निकलता है। रास्ते मे ये सोच कर खुश था कि किसी और की पाउ खाली नहीं की और बिटिया की पढ़ाई भी हो जाएगी। गाँव के मोड़ तक पहुचा ही था कि कूडे k ढेर को देख रुक गया और सुबह लड़कों ki बात याद करने लगा … कुबेर का खजाना है ये। 

"कूडे मे मुझे 1 पाउ की chappal तो मिल ही जायेगी ….. किसी ने अपने पुराने chappal को क्या पता फेंक दिया हो …. यहा अगर मिली तो चोरी भी नहीं होगी।." 

कूडे के ढेर को हाथो से हटा हटा कर ढूँढने लगता है। खुद की कहीं बात को ठुकरा कर वो कूडे मे टटोलने लगा।. कुछ देर बाद सुखी को 1 दाएं पाऊ की chappal मिल ही गई। 

" ये मिली 1 chappal… लेकिन ये तो मेरे दूसरे वाले के जैसी है नहीं …. दो पैरों मे अलग अलग पहनूँगा तो लोग क्या कहेंगे ?... हंसेंगे मुझपर … और कोई उपाय भी तो नहीं है मेरे पास … कल बिना chappal के गया तो पाउ झुलस जाएंगे … हम पैरों मे रहने वाले लोग है।. हमारे पैरों को कोई नहीं देखने वाला … सबके सर आसमान की ओर होते है।. "

टूटी chappal फेंक के वो अपनी नयी chappal पहन लेता है. उसके लिए वो कूडे मे मिली chappal ही नयी  थी। 

भगवान ने सुखी की मदद की।.? क्या उसको मंदिर के बाहर से चोरी ना करने का उपहार मिला ? ये खुशी जो सुखी को मिली वो उसको उसके संतोष ने दिया ? उसने अपने गरीब होने के सच को अपनाया और भगा नहीं। लेकिन वो अपने किस्मत से हारा नहीं।काश उसको छोटी सी चीजों मे दुनिया की खुशी ढूँढते ढूँढते दुनिया के साथ दुनिया की खुशी ढूँढने को ना निकलना पड़े। 


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