जिंदगी
जिंदगी
आज मुझे एक मोड़ पर जिंदगी मिली। मैंने सोचा उससे कुछ गुफ़्तगू कर लूं। मैंने पूछा "ऐ जिंदगी! तुममें ऐसा क्या है कि लोग तुम्हें समझ नहीं पाते? क्यों तुमसे परेशान रहते हैं? मैं तुम्हें समझना चाहता हूँ!
जिंदगी मुस्कराती हुई बोली" क्या तुम्हारे माँ बाप अभी तक जीवित हैं?
मैंने उत्तर दिया "हाँ"
जिंदगी बोली "फिर तू मुझे नहीं समझ पाएगा। क्योंकि तेरे माँ बाप दुनिया से तुमको बचाएंगे। तुझे कभी किसी चीज की कमी नहीं होने देगा। तेरा बाप कभी तुझे मजबूर नहीं होने देगा। तेरी माँ तुझे कभी भूखे पेट सोने नहीं देगी। तुझे प्यार की कमी नहीं होगी। तुझे अकेलापन कभी महसूस नहीं होगा परिवार में। दोनों तुझे एक पेड़ की तरह अपनी छाया में धूप नहीं लगने देंगे "
मुझे कुछ समझ नहीं आया। मैंने जिंदगी से मतलब पूछा।
जिंदगी बोली" जो इंसान कभी मजबूर ना हुआ हो, ना अकेला हुआ हो, जिसे ना प्यार की कमी हो, ना दुखी हुआ हो, जिसने अपनों को ना खोया हो वो कभी भी मुझे समझ नहीं पाएगा। जिस दिन तेरे सामने इनमें से कोई भी परिस्थिति सामने आई तुझे मैं समझ में आ जाऊँगा।"
मुझे अब भी जिंदगी समझ नहीं आई।
