तपस्या
तपस्या
यदि पार्वती ने तपस्या न की होती तो शिव को कैसे पाया होता और हम साधारण स्त्रियां भी तपस्या करके ही अपना जीवन साथी पाती है परंतु उसके बाद होता क्या है जैसे ही स्त्री पति को परमेश्वर मानना शुरु करती है उसमे का अहंम का रावण जाग जाता है और उसकी तपस्या उसे धूमिल नजर आने लगती है फिर वो उसे साफ कर जिदंगी का कुछ पडाव पार कर अपनी तपस्याओ पर खरी उतरकर अपना बेटा रूपी रत्न हासिल करती है !
समय बीतता है ,फिर एक दिन वही रत्न उसकी साधना की परीक्षा लेता है ,और सवाल होता है तुमने मुझे पैदा ही क्यों किया? उसके बाद जब नारी ये सुन लेती है ,उसे अपने बेटे को पाने के लिये की हुयी तपस्या का पूर्ण अहसास हो जाता है और वो निश्बद होकर अपने जीवन मेंआने वाली समस्याओ के
लिये अपने आप को एक नयी साधना के लिये तैयार कर रही होती है और एक दिन अग्नि तपस्या देने के लिये अपने जीवन के अंतिम पडाव की और अग्रसर होती है !
