लघुकथा
लघुकथा
एक राजा था,उसके पास अपने ही पंसद का एक हाथी था,वो राजा को अंत्यंत प्रिय और चहेता हाथी था,दिन गुजरने लगे एक दिन हाथी को महावत,किसी तालाब कीनारे पानी पिलाने ले गयें ।तालाब में पानी कम था ,कमल के फूल तथा कीचड़ ज्यादा था ,हाथी धीरे धीरे कीचड़ की ओर चला गया और
दल दल में धंसने लगा! सारे महावत दौड़े आया,उसे भाले की नोंक से उपर लाने की कोशिश की गयी ,लेकीन उस असहनीय पीड़ा की वजह से वो उपर आने में असमर्थ रहा राजा भी उसे देख दुखी और चिंतित हो गया !उसके बाद राजा नें एक बुजुर्ग महावत को बुलाया उसने राजा को युक्ति बतायीं और कहने लगा युद्ध का बिगुल बजाकर सेना को लड़ाई की तैयारी कर खड़ा कर दो ।राजा नें वैसा ही कीया युद्ध का बिगुल बजवाया जैसे ही युद्ध की
ध्वनि सुनाई दी हाथी नें पूरा जोर लगाकर अपने आप को ऊपर ले आया
इससे हमें यह सीख मिलतीं हैं अपना मनोबल कभी भी कमजोर नहीं होने दे ।मनोबल के दृढ़ होने की वजह से ही हाथी अपने आप को बचा पाया।
