Viral Rawat

Drama


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तेरी मेरी केमिस्ट्री

तेरी मेरी केमिस्ट्री

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दसवीं कक्षा भी मिला-जुला एहसास दिलाती है। कभी पहली बार बोर्ड परीक्षा देने का भय उत्पन्न करती है तो कभी अपने एकदम से बड़े बच्चे कहलाने की ख़ुशी देती है। इन्हीं अनुभवों से होते हुए मैं भी दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर ग्याहरवीं में पहुँच गया।

नयी कक्षा,नये अनुभवों के साथ नयी किताबों की आवश्यकता मुझे स्टेशनरी-शॉप तक ले पहुँची।

उसी दुकान पर पहली बार मेरी मुलाकात मेरे पहले प्यार से हुई। सफ़ेद और नीले लिबास में उसका आवरण देखा तो देखता ही रह गया। पहली बार में मुझे कुछ मोटी लगी।खैर, उसे नज़रंदाज़ करते हुए कुछ ज़रूरी सामान लेकर मैं घर आ गया।

 अगले दिन स्कूल में मुझे वो फिर दिखी, बिल्कुल मेरे कक्षाध्यापक के बगल में। सर उसे आगे-पीछे से प्यार भरी नज़रों से देखकर मुस्कुरा रहे थे।मुझे ये अच्छा नहीं लगा। मेरे कक्षाध्यापक रसायन विज्ञान के अध्यापक थे और मैं उनका सबसे प्रिय विद्यार्थी था ऐसे में सर की उससे नज़दीकी मुझे अखरने लगी। कोचिंग में भी वो मुझे सर के बगल में ही बैठी दिखी।

" ये अचानक कहाँ से आ टपकी। इससे पहले तो स्कूल में कभी नहीं दिखी। आते ही सर की लाडली भी बन गयी।"- मैं कुछ दिन इसी सोच में डूबा रहा।

सर पढाते समय हमेशा उसे ही देखते रहते थे।हमेशा उसकी तारीफ़ में कसीदे पढ़ते।

शुरुआत में मेरी उससे बिल्कुल नहीं बनती थी, कारण उसका स्वाभाव मेरी समझ से परे होना था। कभी तो ऐसे लगता जैसे मेरे लिए ही बनी है लेकिन कभी लगता की इसके साथ साल कैसे गुजरेगा? एक दूसरा कारण सर से उसकी नजदीकी था।

लेकिन धीरे-धीरे वो मुझे समझ आने लगी। हम अच्छे दोस्त बन गये। अधिकतर समय हम साथ में बिताने लगे। उसके साथ पढाई करके मेरे मार्क्स भी अच्छे आने लगे। अब मुझे उससे प्यार होने लगा। उसके शब्दों का "रसायन" मेरे मन को आनंद से भर देता था।

 क्लास में मेरा एक दोस्त नदीम भी उससे प्यार करता था। वो कभी-कभी क्लास में नदीम के साथ बैठी दिख जाती थी। मैं चाह कर भी उसे मना नहीं कर पता था। मैं और नदीम हमेशा ज्यादा मार्क्स लाकर उसे प्रभावित करने में लगे रहते।

खैर, इसी तरह दो साल गुज़र गये मैंने उसके साथ पढाई की और बोर्ड परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किये। 

कॉलेज में भी पहले दिन वो मुझे अध्यापक के बगल में दिखी।

मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा।

वहाँ हमारा प्यार और परवान चढ़ा। हर तरफ हम दोनों के ही चर्चे थे। कोई मुझे मेंटल कहता तो कोई उसका आशिक लेकिन मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था।

 मेरे घरवालों को ये बात पता नहीं थी। उन्होंने तो मेरे लिये किसी और को चुन रखा था। जब मुझे इस बात का पता चला तो मैंने बग़ावत कर दी। मैंने कहा-"मुझे इसके सिवा कुछ पसंद नहीं आता। मुझे अपना सारा समय इसी के साथ बिताना अच्छा लगता है।"खैर, घरवालों ने मेरी बात मान ली और मुझे उसके साथ अपना भाग्य आजमाने की अनुमति दे दी।उसने मुझे कभी धोखा नहीं दिया। स्नातक, परास्नातक और फिर पी एच.डी. , आज तक उसने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा।

कक्षा ग्यारह की वो रसायन विज्ञान की किताब आज भी मेरा पहला प्यार है। हम दोनों में बहुत अच्छी "केमिस्ट्री" है।

अक्सर सभी को प्यार किसी जीवंत, सुन्दर दिखने वाले व्यक्ति या वस्तु से होता है। लेकिन मेरा प्यार एक किताब,एक भाव, एक विषय से है जिसने मुझे धन, अच्छा पद और एक अच्छा कल प्रदान किया।

उसके लिये मेरा प्यार देखकर आज भी कई लोगों को मुझसे इर्ष्या होती है। शायद वो भी उसे चाहने लगे हैं...


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