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बेज़ुबानशायर 143

Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Inspirational

सोचो उनको जो नहीं रहे

सोचो उनको जो नहीं रहे

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सोचो  उनको जो नहीं रहे,

कुछ दिन खेले फिर चले गये।

तुम  जैसे ही वो आये थे, 

संग में कुछ भी न लाये थे।


मेरा  मेरे  के  चक्कर  में,

दिन जीवन का सब बीता था।

सब छोड़ चले इस दुनिया में,

आने  जैसा  ही  चले गये।।


है  मृत्यु लोक का सर्व सत्य,

जो  आता  है वह जाता है।

आने  जाने  के  अन्तर में, 

कुछ कर्म सृजित कर जाता है।


इस सदा सत्य की महिमा को,

जिसने भी दिल से जान लिया।

निज अच्छे कर्म विचारों से,

वह नाम अमर कर जाता है।।


है साख  सदा ही कर्मों की,

इसकी ही जग में प्रभुता है।

सूरत की  कीरत कभी नहीं,

सीरत  ही  पूजा  जाता  है।


सबसे  अच्छा के चक्कर  में,

न कर्म किया  कोई  अच्छा।

जब  जाने  की  बारी आई,

तब करनी पर क्यों रोता है।।


खाना  पीना  सोना  जगना,

अच्छे  महलों में रहना भी।

होता  नसीब  जो बहुतों  को,

पड़ता  है  उनको भी मरना।


जो  इन जैसा  जीवन  तेरा,

जिसमें मानव  हित योग नहीं।

फिर  तो  मानव जीवन पाना,

स्वर्णिम  मौके को  है खोना।।


चले गये  भगवान  राम जी,

वसुदेव  लाल भी चले  गये।

गाँधी  गौतम   ईसा  मसीह,

मुहम्मद  साहब भी नहीं  रहे।


अपनी अनुपम कृतियों से ये,

हैं  अमर  आज भी दुनिया में।

जीवन  कृतार्थ करने हित  में,

उनको  सोचो  जो चले गये।।


अपनी  शेख़ी  में  लगे  रहे,

रिश्तों  को धन से ही तौले।

मज़लूमों का हक़ हड़पित कर,

उनके  हिस्से  से  पेट भरे।


जीवन महिमायित  करने का,

ईश्वर  ने मौका बहुत  दिया।

पर  दर्प  भाव की प्रभुता से,

सुन्दर  पथगामी  नहीं  बने।।



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