संघर्ष

संघर्ष

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रितु बधाई हो ! तुझे आज डिग्री मिल गई है।

अच्छा ऽ ऽ तेरे उस जाॅब का क्या हुआ, जिसका इंटरव्यू तूने गत सप्ताह दिया था ?? अरे मौसी, वही तो तुझे बताने जा रही थी, मुझे वह जाॅब मिल गई है, मगर तू तो बताने का मौका ही नहीं दे रही है! ओह माई गाॅड ! बहुत- बहुत बधाई हो ! मेरी बच्ची, तू आज अपने पैरों पर खड़ी हो गई है। ये सब तेरी मेहनत और तेरी माँ के संघर्ष का नतीजा है। मालती तुझे भी बहुत- बहुत बधाई हो ! तेरे संघर्ष का फल आज तेरी बेटी ने तुझे दे दिया ! भाई साहब मुबारक हो !आपकी दुआ से आज रितु अपने पैरों पर खड़ी है!

क्यों शर्मिंदा करती ऽ हो ऽऽ बहनऽ? कुछ हकलाते हुए नरेश ने कहा। मुझे मालती झेल रही है, यही बहुत है ।

मालती सुबकने लगी थी---। अरे पगली रो क्यो रही हो? अभी खुशी मना, तुने अपने जीवन में बहुत दुःख उठाया है।

याद है तुझे 'अतीत 'की वे भयावह रातें----। न - पूजा -न मुझे वह सब याद मत दिला---। हाँ ठीक कहती हो ! चलो रितु !आज हम तेज संगीत में नाचते हुए खुशी मनाएंगे ! हा---हा---हा मौसी ! अगर मम्मी से डांस करवा लो तो जानूं !

अचानक मोबाइल में गाना बजने लगा- --

"दमादम--मस्त--- कलंदर------" मालती ने डांस करना शुरू कर दिया, मैं भी मालती का साथ देने लगी। रितु अवाक होकर माँ को डांस करते हुए देख रही थी। वह भी खुशी में शामिल हो गई।


रात को रितु ने पूछा "अच्छा मौसी, तुम मम्मी के किसी अतीत के बारे में बात कर रही थी? क्या इसे बताऊं ? लगता है मालती ने अपने बारे में इसे कुछ बताया नहीं है। रितु तेरी माँ ने जितना सहा है ! उतनी अन्य कोई होती तो या तो भाग जाती, या आत्महत्या कर लेती !

मौसी पहेलियाँ न बूझाओ, सब कुछ साफ- साफ बताओ, मुझे भी जानने का अधिकार है!

तो सुनो मुझे एक वचन दो, अतीत की बातें जानने के बाद तुम अपने पापा से घृणा नहीं करोगी।

वादा----।

नरेश भाई साहब अपनी जवानी में बहुत ही बांका, सजीला हंसमुख नौजवान था। मगर गलत संगत में पड़कर शराब पीने लगा था। धीरे- धीरे अतीत मेरे आँखों के सामने दौड़ने लगा। मैं नरेश भाई साहब के पड़ोस में रहती थी। मेरा उनके घर काफी आना जाना था। नरेश भाई की शादी खूब धूमधाम से हुई थी। मालती ज्यादा पढ़ी लिखी नही थी, इंटर पास करते ही उसकी शादी तय हो गई थी। गोरी-चिट्टी ,गोल चेहरा, माथे पर एक बड़ी सी बिन्दी, जो भी देखता, देखते रह जाता। बहुत जल्द मालती मेरी सहेली बन गयी थी। शादी के बाद कुछ दिन हँसी- खुशी से बीता ।

अचानक एक रात दरवाज़ा पीटने की आवाज़ से मेरी नींद खुली। पापा ने उठकर दरवाज़ा खोला था। घबराई हुई सी मालती ने घर में प्रवेश किया। मैं कुछ समझती इससे पहले ही, नशे में धुत नरेश ने दौड़ते हुए आकर मालती को लगभग घसीटते हुए ले गया। पापा ने दरवाज़ा बंद करते हुए मेरी तरफ आँखें दिखाकर कहा, दूसरों के मामलों में दखल देने की जरूरत नहीं है। अगले दिन सुबह जब मैं मालती से मिलने पहुँचीं तो देखा मालती का एक आँख सूजा हुआ है, और एक ओर का गाल फूल के गोल गप्पें बने हुए हैं। मुझे देख उसके आँखों से आँसू झरने लगे। मालती ने कहा शादी के पहले रात से ही ये पीते हैं। अब तो हाथ भी उठाने लगे हैं। घर के लोगों को कुछ बोलने पर वे कहते हैं कि "मैं अपने पति को संभाल नहीं सकती।" मुझसे दुखी होकर ही ये पीने लगे हैं। मैंने मालती को सच्चाई बताते हुए कहा कि इन्होंने तुम्हें धोखा दिया है। मालती बोली मुझे पता है बहन, मैं अब क्या करूँ? मेरे पापा दिल के मरीज़ है।उन्हें मैं दुखी नहीं कर सकती, अब मैं कहाँ जाऊँ??

घरवालों ने नरेश को काफी समझाया, मगर शराब के नशे से वह मुक्त न हो सका। अब धीरे- धीरे मालती पर अत्याचार बढ़ता जा रहा था। नरेश का बड़ा भाई और छोटा भाई अपने परिवार के साथ अलग रहने लगे थे। आंटी ने नरेश को ठीक करने के लिए अनेक तंत्र मंत्र, दवा सब कोशिश की, मगर उसके अत्याचार के बीच खुद एक दिन उसे ठीक करने की आशा लिए स्वर्ग सिधार गई। इस बीच मालती एक बेटे की माँ बन चुकी थी। अब मालती को जीने का सहारा मिल गया था, दिन में नरेश साधारण इंसान की तरह रहता, मगर रात में जब वह पीकर आता तो पूरी तरह से जानवर बन जाता।


एक रात करीब साढ़े दस बजे मैं और मालती दोनों उस के घर में टीवी देखते हुए बातें कर रही थी। दरअसल मेरी शादी तय हो गई थी। मालती भी सुनकर खुश थी। अचानक नशे में धुत नरेश आया और आते साथ मुझे गाली देने लगा। मालती ने उसे चुप कराने की कोशिश की तो उसने मालती को पकड़ कर पीटना शुरू कर दिया। बाल पकड़ कर नीचे पटक कर अमानवीय तरीके से लात घूसे बरसाने लगा। मैं तो रोने लगी थी, और पलंग के नीचे जाकर बैठ गई थी। आश्चर्य मालती मार खाती रही और वह मारता गया। अचानक नरेश ने मालती के सिर को दीवार से दे मारा, मालती के मुंह से चीख निकली और वह बेहोश हो गई। उसका सर फट गया था, जिससे खून बह रहा था। बच्चा जाग कर रोने लगा था। मैं किसी तरह पीछे के दरवाज़े से छिपते-छूपते बाहर निकल कर अस्पताल फोन किया। अस्पताल में होश आने पर पुलिस ने पहले बयान लिया तो मालती ने कहा कि वह घर में सीढ़ी पर से गिर गई थी।

मुझे मालती पर बड़ा गुस्सा आया था। पर मालती ने कहा कि बेटे को लेकर वह कहाँ जाएगी ! जेल जाने पर वह तो एक दो सप्ताह में निकल आएगा, तब और अत्याचार करेगा।

इस तरह चौदह साल बीत गए। मैं ससुराल चली गई थी। कभी- कभी फोन पर बात हो जाया करती थी। उसका बेटा अब बड़ा हो गया था। दसवीं की परीक्षा अच्छे नंबर से पास किया था। बेटा माँ का दर्द समझता था। जब भी नरेश नशे में धुत आता , माँ बेटा घर से बाहर भाग जाते। कभी पेड़ के नीचे, कभी बाथरूम में, कभी अलमारी के अंदर रात भर बंद रहते। नरेश अपने भाइयों को भी तंग करने लगा था। भाइयों ने तंग आकर अपना पुश्तैनी घर बेच दिया।

नरेश को उसका हिस्सा देकर उसे दूसरे शहर में शिफ्ट कर दिया। जहाँ वह एक छोटा सा दुकान चलाने लगा। शुरू के कुछ दिन सब ठीक रहा, मगर फिर जैसे का तैसा।

अचानक एक दिन फोन पर मुझे खबर मिली कि मालती के बेटे की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई है। मैं सुनकर सन्न रह गई। मालती से मिलने पहुँचीं, तो उसे देखकर पहचान ही न पाई ! मालती बिलकुल टूट चुकी थी। मालती बोली, " उसका संसार उजड़ चुका है, अब वह जी न पाएगी। मालती की स्थिति देखकर मैं भी घबरा गई थी। मालती को समझाया, ऐसे मत टूटो,"भगवान कुछ उपाय ज़रूर करेंगे।" ईश्वर किसी को इतना दुख नहीं दे सकते।

और सचमुच करिश्मा हो गया। पैंतालिस साल की उम्र में मालती फिर माँ बनी, एक प्यारी सी सुंदर बेटी "रितु"की माँ। ईश्वर ने उसे जीने का सहारा दे दिया था। मालती रात- रात भर कपड़े सिलाई कर, और कुछ ट्यूशन से अपनी बेटी का परवरिश करती गई।

नरेश की उम्र हो गई और वह बीमार रहने लगा, अब उसने पीना "शायद" छोड़ दिया था। अब उसके दिन मालती के शरण में कटने लगे थे। रितु यह है तुम्हारी माँ का संघर्ष ! मौसी माँ के 'अतीत 'की वह भयावह रातें समाप्त हो गई है, अब उनके जीवन में केवल उजाला है। मालती एक कोने मे खड़ी चश्मा उतार कर आँखों को पोंछ रही थी। रितु दौड़ कर माँ से जाकर लिपट गई। मैं मन में सोच रही थी, धन्य है तू भारतीय नारी! जो टूटी नहीं, झुकी नहीं, बिना किसी से गिले-शिकवे के अपने संधर्ष की मूक गवाह बन अटल खड़ी है।



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