साऊदी वाले की बीवी
साऊदी वाले की बीवी
हेना मेरी बेस्ट फ्रेंड थी। हम दोनो साथ पढ़े साथ बड़े हुए। हम दोनो का घर दूर था। पर हमारी दोस्ती ने सारे फासले मिटा दिए थे। लोग हमारी दोस्ती की मिसाल देते थे।
मैं आगे की पढ़ाई के लिए शहर चली गई। हेना गाँव में ही रह गई। पर हम अक्सर मोबाइल पर बात करके एक दूसरे का हाल चाल ज़रुर पूछा करते। एक दिन हेना का मुझे कॉल आया उसकी शादी फिक्स हो गई है। मैं बहुत खुश हुई मैने कहा वाह क्या बात है। कब है तुम्हारी शादी कैसे हुआ लड़का कैसा है। बहुत सारी बात मैने एक ही साँस में पूछ डाली। उसने हँसते हुए कहा बस करो फलक जब आओगी तो आराम से बताउंगी इतना कह कर उसने कॉल रख दिया। मेरा भी बी एस सी पार्ट 2 का एग्ज़ाम हो गया और मै भी गाँव आ गई। और जाते ही हेना के घर पहुंच गई। हेना मुझे देख थोड़ा शर्म कर बोली फलक आओ ना। कब आई। मैने कहा वाह लड़की तो अभी से शर्मा रही है। वो हँसने लगी, मैने एक ही साँस में पूछ डाला कब है शादी। लड़का क्या करता है।उसने शरमाते हुए बताया लड़का साऊदी रहता है। मेरे भाभी का दूर का कजिन है। लड़का इंजीनियर है। और कोई डिमांड भी नहीं है। उन्होने कहा है की उन्हे सामान नहीं बेटी चाहिए। हेना बहुत खुश थी, उसको देखकर मैं भी बहुत खुश हुई उसकी ख़ुशी में मेरी ख़ुशी आखिर मेरी बेस्ट फ्रेंड जो थी। आज हेना की हल्दी थी। मैं जल्दी जल्दी तैयार होकर हेना के घर गयी। पीले जोड़े और फूलों के जेवर पहने हुए वो कोई अप्सरा लग रही थी। अरे भाभी हमारी हेना कितनी किस्मत वाली है। इतना अच्छा रिश्ता खुद घर चलकर आया बहुत नसीबो वाली है। वर्ना लड़की के शहर जाकर पढने पर भी कहीं अच्छा रिश्ता
मिलता है, बेटी को दहेज दो उपर से पढ़ाओ भी हेना की चाची का इशारा मेरी तरफ था। मैं हल्का सा मुस्कुरा दी। आखिर हेना के दुल्हन बनने का भी दिन आ ही गया सुर्ख़ लाल जोड़े में गहने से लदी और हाथों में मेंहदी, वो किसी जन्नत की हूर लग रही थी। हेना का शौहर भी स्मार्ट था। जोड़ी जंच रही थी। ऐसा लग रहा था दोनो एक दूसरे के लिए ही बने है।
शादी अच्छे से हो गयी उसकी रुखसती के बाद मैं घर आ गई, शादी के तीसरे दिन हिना मायके आ गयी। मैं उस से मिलने गई, उसके तो चाल ढाल ही बदल गए थे, कीमती सारी जेवर की दुकान लग रही थी। और खूब चहक रही थी, उसकी अम्मी ने बताया बरी किस्मतो से मिलता है ऐसा रिश्ता और वो भी साऊदी वाला दामाद आज के जमाने में कौन करता है बिना दहेज की शादी। आज हेना की बातों में अपनापन नहीं था। पर मैं उसको खुश देखकर खुश थी। मैं वापस होस्टल आ गई। अब मेरी हेना से कम बातचीत होती, मैं छुट्टी में घर आई तो पता चला हेना आई है। ना चाहते हुए भी मेरे कदम उसकी घर की तरफ चल पड़े। हेना को देखकर मैं चौक गई। मुझे देखकर वो, हेना पहचान में ही नहीं आ रही थी , उसके सेब जैसे गाल पिचक चुके थे। उसकी बड़ी बड़ी आँखें अंदर धंस चुकी थी। उसके मोटे नागिन जैसे बाल पतली रस्सी की तरह हो चुके थे। उसको गोरा चेहरा पीला लग रहा था। लगता था ये वो हेना नही थी जिसको मैं जानती थी, ये तो कोई और थी। मैंने घबराते हुए पूछा तुम बीमार हो, क्या हुआ है तुम्हें उसने हल्के से हँसते हुए कहा, मैं ठीक हूं फलक अपना सुनाओ। पढ़ाई कैसी चाल रही है, मैने हाँ में सर हिलाया मैने पूछा तुम्हारे हस्बैंड कैसे है। वो हँस कर बोली अच्छे है अभी साऊदी है। दो साल बाद आयेंगे। मैने कहा खुद ही अकेले खाएगी साऊदी के चॉकलेट और डव शैम्पू थोड़ा हम लोगो को भी दिखाती, तो उसने कहा बहुत भरी पड़ता है ये साऊदी का सामान, सामान तो है पर शौहर नहीं, मैं बीमार हूं पर उनके पास मुझ से बात करने का टाईम नही, जेवर तो बहुत है पर किसके लिये पहनूँ। उपर से उनकी अम्मा हर रोज दहेज का रोना रोती है। और मेरी चुगली करती है। मेरे शौहर को मुझ पर भरोसा नही। काश मैं तुम्हारी तरह पढ़ी होती तो खुद के पाँव पर खड़ी हो सकती। क्या बीवी को पैसा भेज देने से सारी जिम्मेदारी ख़तम हो जाती है। अभी तो हम एक दूसरे को सही से जान भी नही पाई और उनका टाईम ख़तम हो गया, मेरा हस्बैंड मुझ से दो मिनट सही से बात भी नही करता, क्या करूँ मैं उन पैसों को वो पैसे मेरे अकाउंट को तो खुश रख सकते है पर मुझे नहीं, अगर कहीं अकेले जाओ तो लोग कहते है साऊदी वाले की बीवी है इसको तो बाज़ार घूमने की आदत है। पैसा से खुशी खरीदने निकलती है। शौहर वहाँ गर्मी में पसीना बहाता है ये बाज़ार में पैसा बहाती है।
